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शनिवार, 19 मई 2012

गंवार लड़की ? -लघु कथा

गंवार  लड़की ? -लघु कथा  

कॉलेज कैंटीन में  बैठे  रिकी और रॉकी अपनी ओर  आती  हुई सुन्दर   लड़की को   देखकर   फूले  नहीं समां  रहे  थे  .लड़की ने उनके  पास  आकर   पूछा  -''भैया  ! अभी  अभी कुछ  देर  पहले  मैं  यही  बैठी  थी  ....मेरी  रिंग  खो  गयी  है ...आपको  तो नहीं मिली ?''रॉकी और रिकी ने बुरा सा मुंह बनाकर मना कर दिया .उसके जाते ही  रिकी रॉकी से  बोला  -''हाउ विलेजर  इज शी  ?[यह कितनी गंवार है ?]हमें भैया बोल रही थी !'' रिकी व् रॉकी कॉलेज में मस्ती  कर अपने  अपने घर  लौट  गए  .घर पर  रिकी ने अपनी छोटी  बहन  सिमरन  को उदास देखा तो बोला -''व्हाट  डिड हैपेन सिस ?……. तुम इतना सैड क्यों हो ?' सिमरन झुंझलाते हुए बोली -''भैया आज कॉलेज में मेरी क्लास के एक लड़के की नोटबुक  क्लास में छूट गयी ....मैंने देखी  तो दौड़कर उसे पकड़ाने  गयी ...पर वो  तो खुश  होने की जगह गुस्सा हो गया क्योंकि मैंने उसे ''भैया ''कहकर आवाज दी थी .बोला ''भैया किसे बोल रही हो ?हाउ विलेजर आर यू ?'मुझे बहुत गुस्सा आया उस पर .''रिकी अपनी मुट्ठी  भीचता हुआ बोला -''कमीना   कहीं का ... मेरी बहन पर   लाइन    मार रहा    था  ....सिमरन उस कमीने से अब   कभी  बात   मत करना !!!
                                                                                शिखा कौशिक   
                                                                          [मेरी कहानियां   ]

बुधवार, 9 मई 2012

''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!-A SHROT STORY

''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!-A SHROT STORY 

'संतरेश  की माँ यहाँ आ   ...'' पति सत्तो   की  कड़क   आवाज़  पर बर्तन    मांजती    सुशीला    धोती  के पल्लू  से हाथ पोछती हुई रसोईघर से निकल  आँगन में  पड़ी खाट  पर बैठे पति  के पास आकर जमीन पर उकडू बैठ गयी .संतरेश  का  बाप  अंगूठे व् तर्जनी से पकड़ी हुई बीडी को मुंह   से निकालते  हुए  बोला  -''कल्लू  मिला  था  ...कह  रहा  था  सत्रह  की हो   गयी तेरी  लौंडिया  ..ब्याह  न  करेगा  ?''...मैं बोला तू ही बता  ...तो बोला ..''तीन  हज़ार  dene को taiyar है पास  के gauv   का सुक्खू   ...उम्र भी बस   चालीस   के आस   पास  है .मैं बोला तीन  तो कम हैं  ...इतना तो छोरी  ही कमा  लावे है काम  करके इधर उधर से ....फिर वो बोला 'अच्छा kal    को बताऊंगा  सुक्खू से बात करके ...''...इब तू बता  के कहवे ?'' सुशीला मुंह बनती  हुई बोली -''धी का जन्म तो होवे ही है नरक भोगने को ...जितने में चाहवे कर दे ..मैं कुछ  बोल के क्यों खोपडिया  पे जूत लगवाऊँ ....'''ये कहकर  सुशीला बर्तन  धोने  फिर  से  रसोईघर  को  चली  गयी  .दो दिन बाद संतरेश की शादी सुक्खू के साथ  हो गयी .विदाई  के समय सुशीला की आँख में आंसू  थे और सत्तो रूपये  गिनते  हुए  मन में सोच रहा था कि-''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!
                                                -shikha  kaushik  

रविवार, 6 मई 2012

मेरे पापा .. तुम्हारे पापा से भी बढ़कर हैं-a short story




   स्कूल  में  भोजनावकाश  के  समय  कक्षा  पांच  के तीन  विद्यार्थी  राजू ,सोहन व् बंटी ने अपने टिफिन बॉक्स खोले और निवाला  मुंह में रखते हुए राजू बोला-''...पता है सोहन मेरे पापा को  मेरी  बहन बिलकुल पसंद  नहीं .पापा कहते हैं कि यदि उसकी जगह भी मेरे भाई होता तो हमारा  परिवार पूरा हो जाता .कल हम दोनों में लड़ाई हो गयी .मेरी गलती थी ....पर पापा ने मेरी बहन के गाल पर जोरदार  तमाचा लगाते हुए कहा-शर्म नहीं आती अपने भाई से लडती है !''.....सोहन बोला-''मेरे पापा तो तुम्हारे पापा से भी बढ़कर हैं कल माँ से कह रहे थे -''यदि इस  बार लड़की  पैदा  की तो घर   से  निकाल दूंगा तुझे  ..तुम  तो जानते  ही  हो मेरे पहले  से ही  तीन छोटी  बहने    हैं .''.....उन    दोनों की बात  सुनकर  बंटी बोला -''...पर मेरे पापा तुम   दोनों के पापा से बढ़कर हैं .मेरी माँ के पेट     में ही  जुड़वाँ  बहनों  को परसों  ख़त्म  करवाकर  आये  हैं .ये  तो अच्छा  हुआ   कि मैं  लड़का  हूँ  वरना  वे  मुझे  भी जन्म न  लेने   देते   ....''  तभी   भोजनावकाश   की समाप्ति  की घंटी  बजी  और 
तीनों  अपनी  अपनी  सीट   पर जाकर  बैठ   गए  .
                 शिखा कौशिक  

शुक्रवार, 4 मई 2012

लघु कथा- ''माँ मैं इसलिए बच गया ''

लघु कथा- ''माँ मैं इसलिए बच गया ''



Dog : Pomeranian dog isolated on a white background Stock Photo
गूगल से  साभार 


सब्जी मंडी में अचानक रूपाली का चार वर्षीय  बेटा अर्णव ज्यों ही उससे हाथ छुड़ाकर भागा  तो  रूपाली का सारा ध्यान अर्णव की  ओर  चला गया . अर्णव ने तेजी  से भागकर एक पिल्ले को नाले में गिरने से बचा लिया .इसके बाद अर्णव रूपाली की ओर दूर से ही मुस्कुराता हुआ दौड़कर आने लगा कि तभी एक तेज़ रफ़्तार से   आती   बाईक  को   देखकर रूपाली सिहर  उठी  .अर्णव उसकी  चपेट  में आ   ही  जाता तभी एक युवक ने तेज़ी से आकर  अर्णव को अपनी  ओर खींच  लिया और...एक हादसा होने से बच गया .रूपाली भागकर उस युवक के पास  पहुंची  और उसका शुक्रिया  अदा  किया  फिर  अर्णव को अपनी बांहों में भरकर रो   पड़ी .अर्णव मासूमियत से माँ के आंसू  पोछते   हुए  बोला -''माँ मैंने उस पिल्ले को बचाया  था  न  नाले में गिरने से उसी तरह इस भईया ने मुझे उस बाईक से बचा लिया .मैं इसी  लिए बच गया .वो  देखो  वो प्यारा  सा  पिल्ला   कैसे पूंछ   हिला  रहा है !'' रूपाली ने रुधे गले से ''हाँ बेटा '' कहा और उसका हाथ पकड़कर सब्जी लेने के लिए दुकान की ओर चल दी .

                                                                                              शिखा कौशिक 
                                                                                      [मेरी कहानियां ]