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रविवार, 30 जून 2013

दांवपेंच -एक लघु कथा

Portrait of a woman with her daughter stock photography
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अलका को ससुराल से मायके आये एक दिन ही बीता था कि माँ ने उसकी एकलौती भाभी को उसके मायके भेज दिया .माँ बोली -''जब तक अलका है तुम भी अपने घर हो आओ .तुम भी तो मिलना चाहती होगी अपने माता-पिता , भाई-बहन से .''  मन प्रसन्न हो गया माँ की इस सदभावना से .भैया भाभी को छोड़ने उनके मायके गए हुए थे तब माँ अलका को एक कीमती साड़ी देते हुए बोली-''ले रख ! तेरी भाभी यहाँ होती तो लगा देती टोक .इसीलिए जिद करके भेजा है उसे .अब दिल खोलकर अपनी भड़ास निकाल सकती हूँ .क्या बताऊँ तेरा भैया भी हर बात में बीवी का गुलाम बन चुका है ...''और भी न जाने दिल की कितनी भड़ास माँ ने भैया-भाभी के पीछे कहकर अपना दिल हल्का कर लिया और मेरा दिल इस बोझ से दबा जा रहा था कि कहीं मेरी सासू माँ ने भी तो ननद जी के आते ही इसीलिए जिद कर मुझे यहाँ मायके भेजा है .''

शिखा कौशिक 'नूतन' 

बुधवार, 26 जून 2013

सुसाइड नोट-एक लघु कथा

Suicide -
सर्वाधिकार सुरक्षित [do not copy]



'' विप्लव हमें शादी कर लेनी चाहिए ..'' सुमन ने विप्लव के कंधें पर हाथ रखते हुए कहा .विप्लव झुंझलाते हुए बोला -'' ..अरे यार .. तुम यही बात लेकर बैठ जाती हो ...कर लेंगें ''  सुमन उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी और अपने बैग से टिफिन निकालते हुए विप्लव से बोली -'' ...ओ.के.  ...मैं तो यूँ ही ...बस घबरा जाती हूँ ...इसीलिए कह रही थी कहीं हमारे शारीरिक संबंधों का पता घरवालों को न हो जाये ....लो ये गाज़र का हलवा खाओ  .''  टिफिन का ढक्कन खोलकर विप्लव की ओर बढ़ा दिया सुमन ने .विप्लव भी सामान्य होता हुआ बोला -''...अब देखो  कोई जबरदस्ती तो की नहीं मैंने तुमसे .तुम्हारी सहमति से ही तो हमने संबंध बनाये हैं .तुम घबराती क्यों हो ?'' यह कहते हुए विप्लव ने हलवा खाना शुरू कर दिया .अभी आधा टिफिन ही खाली कर पाया था की विप्लव का सिर चकराने लगा और मुंह से झाग निकलने लगे .शहर से बाहर खेत के बीच में विप्लव का तड़पना चिल्लाना केवल सुमन ही सुन सकती थी .विप्लव ने सुमन की गर्दन अपने पंजें से जकड़ते हुए कहा -'' साली ...हरामजादी ....मुझसे धोखा ....जहर मिलाकर लाई थी हलवे में !''ये कहते कहते उसकी पकड़ ढीली पड़ने लगी .सुमन ने जोरदार ठहाका लगाया और फिर दाँत भींचते हुए बोली -''...कुत्ते जबरदस्ती नहीं की तूने ....हरामजादे धोखा मैंने दिया है तूझे ...प्यार का नाटक कर शादी के ख्वाब दिखाकर नोंचता रहा मेरे बदन को और अब कहता है यही बात लेकर बैठ जाती है ...कमीने मेरी छोटी बहन को भी हवस का शिकार बनाना चाहता था तू ....उसने बताया कल उसे अकेले में पकड़ लिया था तूने ...सूअर अब तू जिंदा रहने लायक नहीं है ..न जाने क्या क्या कुकर्म करेगा तू ..जा और पाप करने से बचा लिया तुझे ..''  सुमन ने देखा विप्लव अब ठंडा  पड़ने लगा था .सुमन ने टिफिन में बचा हलवा खाना शुरू कर दिया .हलवा खाते  खाते  उसने बैग से एक  कागज  निकाला  और अपनी बांयी हथेली में कसकर पकड़ लिया ..............अगले दिन अख़बार में खबर छपी -''ऑनर किलिग़ के डर से एक प्रेमी युगल ने आत्महत्या कर ली .प्रेमिका के पास से मिला सुसाइड नोट ''

शिखा कौशिक  'नूतन  '

गुरुवार, 20 जून 2013

आग-एक लघु कथा

Fire : Firefighters fighting fire during training  Stock Photo
आग-एक लघु कथा 
सारी  बस्ती धूं धूं कर जल रही थी .चीख पुकार मची हुई थी .कोई चिल्लाता -''बचाओ  ...मेरे बच्चे को बचाओ '' कोई चिल्लाता ''हाय मेरा सब कुछ जल गया .'' किसी की आहें दिल दहला देती  तो किसी का कराहना .बस्ती वालों की आँखें धुएं के कारण खुल तक नहीं पा रही थी . सब कुछ स्वाहा होने से  फायर -ब्रिगेड तक नहीं रोक पाई .जो बच  गए उनके मुंह पर बस एक ही बात थी -''ऐसी प्रचंड आग नहीं देखी..लगता था माँ चंडी ही अग्नि का रूप लेकर हमें जलाने आई थी .''अग्नि शांत हुई तो अपनों की खैर खबर लेने का सिलसिला शुरू हुआ .शायद ही कोई परिवार था जिसका व्यक्ति न जला हो .सभी अपना सिर पकड़ कर अपने जान -माल के नुकसान का शोक मना रहे थे तभी एक साधु बाबा उधर से निकले . उनके मुख के तेज़ से प्रभावित होकर सभी बस्ती वाले उनके चारों और इकठ्ठे हो गए .शेरू गिड़ गिडाता  हुआ बोला -'' महाराज हम गरीबों पर ईश्वर ने जुल्म कर दिया .सब फूँक  कर रख दिया .'' साधु बाबा उसे समझाते हुए बोले -'' बेटा उसे क्यों दोष देता है ...मैं देख रहा हूँ कुछ माह पहले एक निर्दोष युवती को डायन  कहकर इसी बस्ती में नंगा करके घुमाया गया था ..तुम सब देखते रहे थे .कुछ नहीं बोले ...उस युवती ने घटना से दो दिन बाद ही अपने पर मिटटी का तेल छिड़ककर आग में जलकर जान दे दी थी .ये वही युवती आग के रूप में तुम सबको भस्म करने आयी थी पर एक नन्ही सी बच्ची के कारण तुम सबकी जान बच गयी क्योंकि उसे आग से  डरा हुआ देखकर वो उस युवती की प्रतिशोध की आग ठंडी पड़ गयी ...याद करो एक बच्ची नंगी घुमाई जा रही उस युवती के लिए अपने घर से चादर लेकर दौड़ी थी ...'' बस्ती वाले साधु बाबा की बातों पर आपस में बातचीत करने लगे और फिर जब साधु बाबा की ढूंढ मची वे ढूंढें न मिले .

शिखा कौशिक 'नूतन '

सोमवार, 17 जून 2013

हमारी बहू मोदी -लघु कथा

Indian_bride : Hands of an Indian bride adorned with jewelery, bangles and painted with henna.
हमारी बहू मोदी -लघु कथा

बहू के विदा होकर ससुराल में पैर रखते ही ससुर  जी बोले -यदि ये बहू यहाँ रहेगी तो मेरा रुतबा घट जायेगा क्योंकि मैंने इस विवाह का विरोध किया था .ससुर जी के छोटे भाई समझाते हुए बोले -आप वयोवृद्ध हैं ...आपका योगदान घर -परिवार में बहुत ज्यादा है ...आपका सम्मान बना रहेगा .'' ससुर जी की बहन बोली -'' मैं आश्वासन देती हूँ ..आपका सम्मान वैसा ही बना रहेगा जैसा इस दुल्हन के आने से पहले इस परिवार में था '' ससुर जी नहीं माने .ससुर जी के बड़े भैय्या का फोन आया -'' क्या नाटक कर रहा है ? नयी बहू आई है सुख समृद्धि लाएगी .मान जा !'' ससुर जी मान गए ....पर दो दिन बाद ही पता चला -नयी बहू के चाल-चलन से खफा ससुर जी के कुनबे ने उनके परिवार से सत्रह पीढ़ियों  से चला आ रहा रिश्ता तोड़ लिया .ससुर जी बोले -ये तो वैसा ही हुआ जैसे मोदी के आते ही एन.डी.ए ने भाजपा से रिश्ता तोड़ लिया और ये गठबंधन   बिखर गया ....कुछ भी कहो बहू के पैर शुभ नहीं पड़े !!

शिखा कौशिक 'नूतन'

शनिवार, 15 जून 2013

मैं तेजाब नहीं गुलाब लाया हूँ -SHORT STORY

roses

रानी  देख  सूरज  हाथ  पीछे  बांधे  हमारी  ही  ओर  बढ़ा  चला  आ  रहा  है  .तूने  उसके  साथ  प्यार  का  नाटक  कर  उसकी   भावनाओं  का  मजाक  उड़ाया  है  .कहीं  उसके  हाथ  में  एसिड  न  हो  .तुझे  क्या  जरूरत  थी  इस  तरह पहले  मीठी  बातें  कर  उसके  दिए  उपहार  स्वीकार  करने  की और  फिर  उससे ज्यादा अमीर वैभव   के  कारण   उसे  दुत्कारने की मैं तो जाती हूँ यहाँ से जो तूने किया है तू भुगत .' ये कहकर गुलिस्ता वहाँ से चली गयी .रानी के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी .सूरज के पास आते ही उसके पैरों में गिरकर गिडगिड़ाने लगी -'' सूरज ...मुझे माफ़ कर दो ...मैंने तुम्हारे  प्यार का मजाक उड़ाया है ...पर ..पर मुझ पर एसिड डालकर  मुझे झुलसाना नहीं .....प्लीज़ !!'' ये कहते कहते वो रोने लगी .सूरज ने अपने पैर पीछे हटाते हुए ठहाका लगाया .वो भावुक होता हुआ बोला -'' मिस रानी ऊपर देखिये ....मैं तेजाब नहीं गुलाब लाया हूँ ..आपको अंतिम भेंट देने के लिए और शुक्रिया ऊपर वाले का जिसने आप जैसी मक्कार लड़की से मुझे बचा लिया .यहाँ से जाकर मंदिर में प्रसाद भी चढ़ाना है ..लीजिये जल्दी से ये गुलाब थाम लीजिये .''  सूरज की बात सुनकर रानी के दम में दम आया और उसने शर्मिंदा होते हुए उठकर वो गुलाब थाम लिया .

शिखा कौशिक 'नूतन '

शुक्रवार, 14 जून 2013

आगे ख़ुदा जाने कौन बेहतर है ?-एक लघु कथा

आगे ख़ुदा जाने कौन बेहतर है ?-एक लघु कथा 


''आ जाओ  बाऊ  जी.. ...मेरी रिक्शा  में बैठ जाओ ...मैं छोड़ दूंगा .'' हड्डी हड्डी चमकते बदन वाले नफीस ने बीच  राह में ख़राब हुई कार के पास खड़े सूटेड-बूटेड मोटे पेट वाले महाशय  को संबोधित करते हुए कहा . वे अकड़कर बोले  - '' कितने लेगा ....लीला होटल के पास है मेरा बंगला ?''  नफीस बोला -''...बाऊ जी वो तो बहुत दूर है ...पचास तो लूँगा ही .'' अपने ड्राइवर को कार ठीक कराकर बंगले पर ले आने का निर्देश देकर वे तीन पहियों की उस सवारी पर सवार हो गए .और नफीस पेंडिल दर पेंडिल चलाते  हुए उन्हें  उनके  गंतव्य  की ओर  ले चला .बंगले पर पहुँचते ही वे महाशय रिक्शा से उतरे और सूट की जेब से बटुआ  निकाल चार दस के नोट नफीस की ओर बढ़ाते  हुए बोले -'' ले रख !' आवाज में ऐसी कड़क थी जैसे मुफ्त में उसे रूपये पकड़ा रहे हो .नफीस गिड़गिडाता  हुआ बोला -'नहीं बाऊ जी  ....ये तो जुल्म  कर रहे हो आप .''  मोटे महाशय भड़कते हुए बोले -'अबे कैसा जुल्म .....रख ले !'' ये कहकर नोट नफीस के हाथ में थामकर वे अपने बंगले की ओर बढ़ लिएनफीस मन मसोसकर रिक्शा मोड़ वापस चल दिया तभी उसे एक आठ-दस साल के  बच्चे ने हाथ देकर रुकने का इशारा किया .नफीस के रुकते ही वो मैले-कुचैले कपड़ों वाला बच्चा बोला -''चच्चा ..मयूर पार्क के पास जाना है ..चलोगे क्या ..कितना पैसा लोगे चच्चा  ?'' नफीस उसकी बात पर हँसता हुआ बोला -''बैठ जा बेटे ..मैं उधर ही जा रहा हूँ .जो जी में आये दे देना .बच्चे ने जेब से निकाल कर पांच का नोट आगे कर दिया .नफीस उसके सिर पर हाथ रखते हुए बोला -''आइसक्रीम खा लियो इसकी बेटा जी  ..अपने इस चच्चा की तरफ से .'' नफीस के ये कहते ही बच्चा खुश होकर रिक्शा में बैठ गया .नफीस ने एक नज़र उन मोटे महाशय के बंगले पर मारी और सोचा -''वाह रे!!! बाऊ जी आपके पास केवल बड़ा बंगला है पर मेरे पास बड़ा दिल है ....आगे ख़ुदा जाने कौन बेहतर है ?' ये सोचते सोचते  वो मस्त होकर अपनी रिक्शा लेकर चल पड़ा .

शिखा कौशिक 'नूतन ' .

गुरुवार, 13 जून 2013

हिन्दू पार्टी का मुसलमान नेता -एक लघु कथा

News Concept Stock Photo
हिन्दू पार्टी का मुसलमान नेता -एक लघु कथा 


टी.वी.साक्षात्कार में   जटिल   प्रश्नों  के  उत्तर देने  के  बाद  साक्षात्कारकर्ता के  इस प्रश्न पर  मिर्जा  साहब  थोडा  अटके जब  उनसे पूछा गया -'' मिर्जा  साहब  गुस्ताखी माफ़ हो ...आप एक  मुसलमान होते हुए एक हिन्दू पार्टी से पिछले बीस साल से जुड़े हुए हैं .पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहें हैं ...तब क्या महसूस किया है एक मुसलमान होकर एक हिन्दू पार्टी की विचारधारा से तालमेल बैठाने में ?''  मिर्जा साहब का चेहरा  सख्त  हो गया .वे   गंभीरता   के साथ   बोले   -'' आप बस   ये   समझ   लीजिये   जैसे   ब्याह   होते ही   लड़की   को   विदाई   के समय  बता  दिया  जाता  है कि आज  से इस घर  को  अपना  मत  समझ  लेना  और  ससुराल  में हमेशा उसको अपने चरित्र की शुद्धता का प्रमाण देना पड़ता है ...कुछ ऐसी ही स्थिति है मेरी . मुसलमान बिरादरी मुझे हिन्दू पार्टी में मेरे होने के कारण दिल से नहीं अपनाती और पार्टी के हिन्दू कार्यकर्ता मुसलमान होने के कारण मुझ पर शक करते हैं कि मैं हिन्दू पार्टी में क्यों हूँ ?'' ये कहकर वे चुप हो गए और साक्षात्कारकर्ता ''मिलते हैं ब्रेक के बाद ' कहकर खिसक लिया .

शिखा कौशिक 'नूतन'

बुधवार, 12 जून 2013

खुला -फैला आसमान -लघु कथा

खुला -फैला  आसमान -लघु कथा 


दिसंबर का माह था .सुरेश घर से बाहर निकला .गोद में दो वर्षीय उसकी पुत्री टिया थी .टिया तेज ज्वर से पीड़ित थी .गर्म कपड़ों में ढकी -छिपी बिटिया को लेकर डॉक्टर की क्लिनिक की ओर चला ही था कि पीछे से किसी कार ने  हॉर्न दिया .सुरेश ने मुड़कर देखा तो ये उसका पडोसी रमेश था .कार में उसकी पत्नी व् एक वर्षीय बेटा भी था .रमेश ने कार की खिड़की से सिर निकालकर पूछा-''क्या हुआ सुरेश ?'' सुरेश ने  टिया  को सँभालते हुए उत्तर दिया  -'बिटिया के तेज बुखार है .डॉक्टर को दिखाने ले जा रहा हूँ .'' रमेश सिर कार के भीतर ले जाते हुए बोला  -'जल्दी जाओ भाई ..आजकल बहुत फ़ैल रहा है फीवर .'' ये कहकर उसने कार आगे बढ़ा दी .सुरेश को उम्मीद थी कि शायद रमेश उसे डॉक्टर की क्लिनिक तक कार से छोड़ देगा पर .......ऐसा कुछ नहीं हुआ .इसके कुछ दिन बाद ही सुरेश टिया को गोद में लेकर घर के बाहर टहल रहा था .टिया का बुखार उतर चुका था .सुरेश ने देखा रमेश की पत्नी मीना अपने बेटे को गोद में उठाए तेजी से कहीं जा रही है .सुरेश ने पूछा -''क्या हुआ भाभी जी ?'' रमेश की पत्नी रोते हुए बोली -'' भाई साहब मेरा बेटा फीवर से तप रहा है और डॉक्टर का नंबर मिल क़र नहीं दे रहा .ये शहर से बाहर काम से गए हैं .कार भी ख़राब है ...इसीलिए बिट्टू को लेकर डॉ.गुप्ता की क्लिनिक पर जा रही हूँ .''  सुरेश बोला -' आप घबराइए मत ...मैं टिया को इसकी मम्मी को देकर आता हूँ '' सुरेश जल्दी से घर के अन्दर गया और टिया को वहां छोड़कर मीना की गोद से बिट्टू को लेते हुए बोला -''मैं जल्दी जल्दी जाता हूँ आप आराम से आ जाइये .'' ये कहकर सुरेश जल्दी जल्दी पैदल डॉ. गुप्ता की क्लिनिक की ओर चल दिया पीछे पीछे चलती मीना यही सोच रही थी कि -'' कार में उस दिन मैं भी तो बैठी थी जब सुरेश भाई साहब टिया को लेकर डॉक्टर की क्लिनिक पर जा रहे थे ...मैंने रमेश को क्यों नहीं टोका......वाकई  कार के अन्दर बैठकर दिल भी कार जितना छोटा हो जाता है .ऐसे कार वाले होने से बेहतर है सुरेश भाई साहब की तरह   बिना वाहन वाले होना .कम से कम सिर पर खुला -फैला  आसमान और पैरों के नीचे जमीन तो रहती है .''

शिखा कौशिक 'नूतन'

सोमवार, 10 जून 2013

फिर कैसा फ़तवा ?-लघु कथा

फिर कैसा फ़तवा ?-लघु  कथा


मौलाना  साहब  को  आते  देखकर  मैं  उठकर  खड़ा  हो  गया  .दुआ -सलाम  के  बाद  मैंने  उनसे  बैठने  का  आग्रह   किया  .इधर -उधर  की बातों के बाद मैंने उनसे जिज्ञासावश पूछ ही डाला -' एक बात बताइए आप लोग विभिन्न मुद्दों पर मौत का फ़तवा  जारी करते रहते हैं पर जब कोई मुसलमान एक हिन्दू पार्टी -जो मस्जिद ध्वस्त कर मंदिर निर्माण की खुले आम वकालत करती है ...ज्वाइन करता है ....पदाधिकारी बनता है.. तब आप लोग उस शख्स के खिलाफ फ़तवा जारी क्यों  नहीं करते ?'' मौलाना  साहब मुस्कुराते हुए बोले -'' पंडित जी हम ऐसे इन्सान को  ईमान बेचने वाला मानते हैं बिलकुल फिल्मों में काम करने वाली  मुस्लिम औरतों की तरह ..फिर कैसा फ़तवा ?'' मौलाना साहब ये कहते हुए उठ कर खड़े हो गए और ''ख़ुदा हाफिज '' कर चल दिए .

शिखा कौशिक 'नूतन' 

रविवार, 9 जून 2013

''आप तो मुसलमान हैं ना -लघु कथा ''

''आप तो मुसलमान हैं ना -लघु कथा ''
शबाना भड़कते हुए बोली -''...पर आप तो मुसलमान हैं ना  ..... आपने क्यों नहीं एतराज़ किया ऐसे जल्लाद को पार्टी की चुनावी  कमान सौपे  जाने पर ...अल्लाह की कसम आपकी अक्ल पर परदे पड़ गए थे क्या ?'' हिन्दू  पार्टी के मुस्लिम महासचिव  साहब  अपनी  सफ़ेद दाढ़ी को सहलाते हुए बोले --'' बेगम इतना गुस्सा सेहत के लिए ठीक नहीं है  . ...ये सियासत की बातें हैं और रही बात मुसलमान होने की तो जान लो उस जल्लाद की नाक कटवाने को ही चुनावी कमान सौप दिए जाने दी है हमने .आप क्या समझती है हमें दर्द नहीं अपने लोगों के  कत्लेआम पर !...आप से भी ज्यादा दर्द है .उस जल्लाद को देखते ही तन-बदन में आग लग जाती है ...ख़ुदा खैर करे इस बार भी पार्टी को पूर्ण  बहुमत मिलने की उम्मीद कम ही है ..अगर इस जल्लाद  की करामातों से हिन्दू वोट मिल गयी तो सत्ता में आते ही मेरा मंत्री पद पक्का है और अगर सत्ता नहीं मिली तो इस जल्लाद का ढोल पिट जायेगा ...नेता की बीवी हो दिल  से नहीं दिमाग से काम लिया करो ...वैसे भी नेता कहाँ हिन्दू-मुसलमान होता है !'' ये कहकर मुस्लिम महासचिव साहब ने जोरदार ठहाका  लगाया और अजान की आवाज पर नमाज पढने के लिए मस्जिद की और चल दिए .''

शिखा कौशिक 'नूतन '

शनिवार, 8 जून 2013

मुझे माफ़ कर दो मेरे बच्चों -लघु कथा

pistol
लघु कथा 


Cute Baby With Hat
सुबह सुबह  घर  का मुख्य  द्वार कोई जोर जोर  से पीट रहा  था .वसुधा रसोई में  नाश्ता  तैयार  कर रही थी गगन  दफ्तर जाने  के   लिए  तैयार  हो  रहा था .वसुधा काम  बीच  में  छोड़कर  झींकती  हुई  किवाड़  खोलने  को  बढ़  गयी .किवाड़  खोलते ही उसकी चीख निकल गयी -'' पिता जी आप ....ये बन्दूक ...!!!'' गगन भी वहां पहुँच चुका था .वसुधा और गगन ने दो साल पहले प्रेम विवाह किया था घर से भागकर और अपने शहर से दूर यहाँ आकर अपनी गृहस्थी  जमाई थी .वसुधा के पिता को न जाने कैसे यहाँ का पता मिल गया था . गगन की छाती पर बन्दूक सटाकर वसुधा  के पिता गुस्से में फुंकारते हुए बोले -''...हरामजादी ...पूरी बिरादरी में नाक कटा दी .आज तेरे सामने ही इस हरामजादे का काम तमाम करूंगा   !'' वसुधा दहाड़े मारकर रोने लगी तभी पायल की छन छन  की मधुर ध्वनि के साथ ''माँ ...पप्पा ...'' करती हुई एक नन्ही सी बच्ची वसुधा की ओर दौड़ती हुई आई .वसुधा के पिता का ध्यान उस पर गया तो हाथ से बन्दूक छूट   गयी और उन्होंने दौड़कर उस बच्ची को गोद में उठा लिया . ''वसु ...मेरी छोटी सी वसु ..'' ये कहते हुए उन्होंने उसका माथा चूम लिया .वसुधा रोते हुए पिता के चरणों में गिर पड़ी और फफकते हुए बोली -''पिता जी मुझे माफ़ कर दीजिये .मैंने आपका दिल दुखाया है .'' गगन भी हाथ जोड़कर उनके चरणों में झुक गया .वसुधा के पिता ने झुककर दोनों को आशीर्वाद देते  हुए कहा -'' आज अगर ये नन्ही सी वसु मेरी आँखों के सामने न आती तो न जाने दुनिया की बातों में आकर मैं क्या अनिष्ट कर डालता .मुझे माफ़ कर दो मेरे बच्चों .'' 

शिखा कौशिक 'नूतन' 

बुधवार, 5 जून 2013

माँ और सासू माँ में अंतर -एक लघु कथा

Talking on mobile phone Stock ImagesIndian woman talking on phone Stock Photo   

माँ और सासू माँ में अंतर -एक लघु कथा 

साल भर के लम्बे अन्तराल के बाद स्नेहा की सहेली कनक का फोन आया तो स्नेहा ने उलाहना देते हुए कहा -'' आ गई सहेली की याद ?'' कनक माफ़ी मांगते हुए बोली -''...अरे ऐसा क्यों कह  रही हो ! ....तुम भी तो कर सकती थी फोन ....चल छोड़ ...बता कैसा चल रहा है तेरा घर-संसार ?'' स्नेहा उदास स्वर में बोली -'' क्या बताऊँ ,,छह महीने पहले माँ चल बसी और तीन महीने पहले सासू माँ .'' कनक लम्बी आह भरते हुए बोली -.ओह ..सो सेड ...आंटी एक्पायर  हो गयी .....उनकी कमी तो तेरे जीवन में कोई भी पूरी नहीं कर सकता ...माँ तो माँ ही होती है.... .तेरी सासू माँ को क्या हो गया था ?'' स्नेहा ने खुद को सँभालते हुए बताया -'' वे बीमार थी .'' कनक सांत्वना देते हुए बोली ''...चल अब तो रानी बनकर राज कर ससुराल में ..अकेली बहू है वहाँ तू .''  स्नेहा कनक को डांटते  हुए बोली -''कैसी बाते कर रही है तू ...मेरे लिए माँ और सासू माँ में कोई अंतर नहीं था और फिर यदि मेरी भाभी भी मेरी माँ की मृत्यु पर राहत  की साँस ले तो मुझे कैसा लगेगा ? ये कहकर स्नेहा ने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया .

शिखा कौशिक 'नूतन'

रविवार, 2 जून 2013

पुलिस की छवि -एक लघु कथा

Little_boys : illustration of a boy cheering on a white backgroundLittle_boys : illustration of a naughty boy  on white background  
जून के माह में शाम को  बगीचे में आराम कुर्सी पर बैठकर हुक्का गुडगुडा रहा था .दोनों पोते वहीँ उधम मचा रहे थे .हनी व् सनी के खेल में मुझे भी मज़ा आने लगा था .सात वर्षीय हनी अकड़ते हुए बोला  -'' सनी तू मेरे से एक साल छोटा  है ...तू चोर बनेगा और मैं इंस्पेक्टर .चल भाग ....मैं पकड़ता हूँ तुझे .''इसके बाद दोनों मेरी आराम कुर्सी के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने लगे .सनी बगीचे से निकलकर अन्दर घर की ओर भाग लिया .हनी उसके पीछे पीछे भाग लिया .सनी उसे चकमा देकर फिर से बगीचे में मेरे पास आ गया .मैंने उसे एक ओर इशारा करते हुए कहा- ''वहां छिप जा ....मैं नहीं बताऊंगा .'' सनी हाँफते हुए बोला   -''  अरे  नहीं दददू ....छिपने की जरूरत नहीं ...आप मुझे दस का नोट दे दीजिये ..मैं अभी हनी को रिश्वत देकर छूट जाता हूँ .'' सनी की  बात सुनकर मैं स्तब्ध रह गया कि पुलिस की छवि   बच्चे -  बच्चे   के दिमाग में क्या बन चुकी है ! मैंने हल्की सी चपत सनी के गाल पर लगाई तभी पीछे से हनी ने सनी को आकर पकड़ लिया .

शिखा कौशिक 'नूतन'