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शनिवार, 31 जनवरी 2015

तो नैना हमारे साथ होती ..!


[published in ravivani [janwani sunday magazine] on 1 feb 2015]
शानदार कोठी के लॉन में कुर्सियों पर आमने-सामने बैठी हुई नैना और पुनीता की जैसे ही आँखें मिली पुनीता गंभीरता की साथ बोली -'' हमेशा अपने ही बारे में सोचती रहोगी या कभी किसी और के बारे में भी सोचोगी ?'' आज पुनीता ने अपने स्वभाव के विपरीत नैना के निर्णय को चुनौती देते हुए ये कहा था क्योंकि किसी के जीवन से सम्बंधित फैसलों में हस्तक्षेप करना पुनीता को कभी पसंद नहीं था .इसीलिए नैना थोड़ा विस्मित होते हुए बोली -'' पुनीता ....ये तुम कह रही हो !!तुम तो हमेशा से यही कहती आई हो कि औरत को अपने बारे में भी सोचना चाहिए . हो सकता है मेरा तीसरी शादी करने का निर्णय इस समाज की सोच से कहीं आगे की बात हो ...बट इट्स माय लाइफ एंड आई थिंक इट्स ए राइट डिसीजन .''
नैना के इस प्रत्युत्तर ने पुनीता को विचलित कर दिया और वो पहले की अपेक्षा और ज्यादा कड़क होते हुए बोली -'' राइट डिसीजन ...माय फुट ..एक बार भी अपने चौदह वर्षीय बेटे अभि के बारे में सोचा है ?क्या है उसके पास ? स्वर्गवासी पिता की यादें और तुम ...बदकिस्मती से पिता का प्यार उसे बचपन से ही नहीं मिल पाया ...केवल दो साल का था अभि जब राम चल बसे थे नैना उसने केवल तुमसे प्यार पाया है और अब एक नए व्यक्ति को लाकर अभि के जीवन में थोप देना चाहती हो तुम ? क्या सोचती हो तुम ...अभि के लिए ये सब इतना आसान है ?वो उस नए व्यक्ति को पिता मान पायेगा ? वो बर्दाश्त कर पायेगा कि जिस माँ पर पिछले बारह साल से केवल उसका हक़ था अब वो किसी और के साथ एडजस्ट करे.......नैना यू आर मैड ..अभि बहुत भावुक बच्चा है .तुमने शायद नोट नहीं किया वो अखबार में ,टी.वी.चैनल्स पर तुम्हारे और मिस्टर शेखर के अफेयर की खबरे पढ़-सुन कर असहज हो जाता है .तुम कैसी माँ हो जो बच्चे के बिहेवियर में आ रहे बदलाओं को महसूस नहीं कर पाती हो .अरे हां ...यू आर इन लव और इस चालीस पार के प्यार के चक्कर में भले ही अभि के दिल के टुकड़े टुकड़े हो जाये ..इसकी तुम्हे रत्ती भर भी चिंता नहीं.'' पुनीता के इस व्यंग्य पर नैना को इतना क्रोध आया कि वो अपनी बेस्ट फ्रेंड पर चीखते हुए बोली -शट अप पुनीता ...चुप हो जाओ ...अभि से बढ़कर मेरे लिए कोई नहीं ..मैंने देखा है उसे पिता के प्यार के लिए तरसते हुए ..शेखर बहुत बड़े दिल वाले हैं .वो अपनी एक्स वाइफ को भी पूरा सम्मान देते हैं अपने बच्चों का पूरा ध्यान रखते हैं .वो तो बच्चों को अपने पास रखना चाहते थे पर कोर्ट ने उनके बच्चों को उनकी एक्स वाइफ की कस्टडी में दे दिया .कितना बिजी रहते हैं शेखर पर जब भी हम मिलते हैं तब सबसे पहले अभि के बारे में ही पूछते हैं .अभि और शेखर कई बार मिल चुके हैं और मुझे नहीं लगता दोनों के बीच कुछ भी असहज है .''
पुनीता नैना की बात पर असहमत होते हुए बोली -'' माई डियर ...इतनी भोली नहीं हो तुम ..सबसे पहले अभि को पूछते हैं ...नैना शेखर जानते हैं कि तुम्हारा दिल जीतना है तो अभि की बात करनी ही होगी .ये अभि के प्रति स्नेह नहीं तुम्हारे प्रति आकर्षण का परिणाम है .ये एक पिता के भाव नहीं प्रेमी के भाव है ....बेवकूफ ...तुम बँट कर रह जाओगी नैना .क्या अभि को दे पाओगी पहले जैसा प्यार ?'' नैना लापरवाह सी होकर बोली -'' हां हाँ क्यों नहीं ..अभि हॉस्टल से आता ही कितने दिन के लिए है घर ...तुम नाहक परेशान हो रही हो ..ये मिडिल क्लास मैंटेलिटी है ..बच्चे के लिए पूरा जीवन विधवा बन कर काट दूँ तब तुम्हे चैन आएगा ! इतनी बड़ी कम्पनी की सी.ई.ओ . हो कर भी तुम्हारी सोच इतनी बैकवर्ड कैसे हो सकती है पुनीता ?'' पुनीता नैना की इस बात की हंसी उड़ाते हुए बोली -'' बैकवर्ड ...हा हा हा ..तुम्हे याद है नैना जब घरवालों की मर्जी से हुई तुम्हारी पहली शादी टूटी थी तब सब तुम्हारे खिलाफ थे पर मैंने तुम्हारा साथ दिया था क्योंकि मैं जानती थी कि साहिल उन मर्दों में से था जो औरत को पैर की जूती समझते हैं फिर तुम बिजनेस वर्ल्ड में नाम कमाते हुए डॉ. राम से दिल लगा बैठी .तब तुम दोनों की शादी की सारी व्यवस्था मैंने ही की थी .तुम्हारे घरवाले इस अंतर्जातीय शादी के खिलाफ थे . तुम्हे याद है या नहीं ...तुम्हारे भाई ने मुझे गोली मार देने की धमकी तक दी थी पर मैं डरी नहीं थी पर आज हालात अलग हैं माइ डियर ! आज अभि मेरे चिंतन के केंद्र में है .मैं नहीं चाहती कि तुम एक ख़राब माँ साबित हो .कल को तुम्हारा बच्चा तुम पर ये आरोप लगाये कि मेरी माँ ने अपनी लाइफ के बारे में तो सोचा पर मेरी नहीं .हॉस्टल में रहकर भी उसे ये सुकून रहता है कि उसकी माँ उसकी हर ख़ुशी-तकलीफ बाँटने के लिए लालायित होगी पर चौदह वर्षीय किशोर को ये समझाना बहुत मुश्किल है कि उसकी माँ किसी पुरुष से उसके हितार्थ शादी कर रही है .नैना ..नैना तुम क्यों नहीं समझती ....आखिर कब तक तुम अपने जीवन की सम्पूर्णता के लिए किसी पुरुष का सहारा लेती रहोगी ...तुम अब एक औरत नहीं ..एक माँ हो ...और ये कोई बैकवर्ड सोच नहीं ..ये सबसे बड़ा सत्य है ...जिस बच्चे को जन्म देकर इस संसार में लायी हो उसके अधिकारों के बारे में भी सोचो ..उसको भी इस समाज में मुंह दिखाना पड़ता है ..तुम्हारे हर आचरण की आंच उस पर पड़ती है .पिछली बार जब मिली थी मैं उससे तब बता रहा था मुझे कैसे उसके सहपाठी तुम्हारे और शेखर के अफेयर को लेकर तंज कसते हैं उस पर ...नैना माना बच्चा स्वार्थी होता है .वो माँ के प्यार को किसी के साथ नहीं बाँट सकता पर माँ तो स्वार्थी नहीं होती ना ..'' पुनीता के ये कहते ही नैना गुस्से में बौखलाते हुए कुर्सी से खड़ी होते हुए बोली -पुनीता दिस इज़ टू मच....तुम मेरी लाइफ में कुछ ज्यादा ही हस्तक्षेप कर रही हो ...मैंने कभी पूछा तुमसे कि तुमने शादी क्यों नहीं की ....फिर तुम क्या जानों बच्चे और माँ के बीच के सम्बन्ध को ? मेरा अभि उसमे ही खुश है जिसमे मैं खुश हूँ ...नाउ लीव मी एलोन फॉरेवर !'' नैना के ये कहते ही पुनीता कुर्सी से उठकर कड़ी हो गयी और अपना पर्स उठकर बिना कुछ कहे वहां से निकल ली .कार से लौटते समय पुनीता ने मन में निश्चय किया कि अब नैना से कभी नहीं मिलेगी .पुनीता का निश्चय डोल भी जाता यदि नैना उससे मिलने आ जाती या केवल एक कॉल कर देती पर नैना ने ऐसा कुछ नहीं किया .अख़बारों और टी.वी. चैनल्स पर नैना और शेखर की शादी की तस्वीरें प्रमुखता से प्रकाशित व् प्रसारित की गयी .आखिर क्यों न होती ...शेखर राजनीति का चमकता हुआ सितारा था और नैना बिजनेस टायकून पर पुनीता की नज़र ख़बरों में ...फोटो में ढूंढ रही थी अभि को ..जो कहीं नहीं था .एक साल बीता ,दो साल बीते .बीच में एक बार पुनीता देहरादून किसी काम से गयी तब अभि से मिलने गयी थी उसके स्कूल .माँ को लेकर उसका ठंडा रिएक्शन देख कर अंदर से कांप उठी थी पुनीता .बेटे का ये रिएक्शन सह पायेगी नैना ? प्रश्न ने झनझना डाला था पुनीता के दिल और दिमाग को और एक दिन टी.वी. ऑन करते ही उस पर प्रसारित ब्रेकिंग न्यूज़ देखकर पुनीता का दिल धक्क रह गया था . खबर ही ऐसी थी .नैना एक पांच सितारा होटल में मृत पाई गयी थी .शेखर पार्टी के एक सम्मलेन के चक्कर में उस होटल में नैना के साथ ठहरे हुए थे .नैना के चिकित्सीय परीक्षण को लेकर तरह-तरह की खबरे आ रही थी .नैना ने आत्म-हत्या की या उसकी हत्या हुई -इसको लेकर मीडिया डॉक्टर से लेकर पुलिस विभाग तक की भूमिका स्वयं ही निभा रहा था पर पुनीता जानती थी कि नैना की हत्या नैना ने ही की है .पुनीता जानती थी अभि से कितना प्यार करती थी नैना इसीलिए शेखर से उसके विवाह पर एतराज था पुनीता को . खबर देखकर सबसे पहले यही विचार आया था पुनीता के दिल में ''नहीं कर पाई ना नैना बर्दाश्त बेटे का उपेक्षापूर्ण बर्ताव ! अभि का दोष नहीं है ..वो शेखर को जीवन में स्थान दे सकता था पर पिता का मान ..बहुत मुश्किल था .इधर बेटे के दिल में अपने लिए घटते प्यार और उधर शेखर की बेवफाई का कल्पित भय .......कितना उलझकर रह गयी थी तुम नैना ! अभी कुछ दिन पहले ही तो अख़बारों और सोशल मीडिया में छा गया था तुम्हारा शेखर का एक और महिला के साथ मिलने-जुलने को लेकर किया गया ट्वीट ....नैना तुम खोखली हो गयी थी और इसका अनुमान मुझे पहले से था ...खोखलापन कहाँ जीने देता है इंसान को !उसी का परिणाम है ये हादसा .'' पुनीता ने ये सोचते सोचते मुंह अपनी हथेलियों से ढँक लिया था और रो पड़ी थी .
नैना की तेरहवी पर जब उसकी कोठी पर पहुंची थी पुनीता तब अभि दौड़कर आया था पुनीता के पास और उसने पूछा था -'' मौसी व्हाई मॉम हैज़ डन दिस ? ....मेरा भी ख्याल नहीं किया .'' पुनीता उसे सांत्वना देते हुए बोली थी -'' रोओ नहीं बेटा ..यही ईश्वर की इच्छा थी !'' पर मन में पुनीता के बस इतना आया था '' अभि तेरा ख्याल किया होता तो शायद नैना हमारे बीच ही होती आज .''


शिखा कौशिक 'नूतन'

सोमवार, 19 जनवरी 2015

लघु कथा -कैसा विरोध प्रदर्शन



Protesters : lots of furious people protesting (a group of people protesting, protest, demonstrator, protest man, demonstrations, protest, demonstrator, hooligan, fan, protest design, protest poster) Stock Photo
लघु कथा -कैसा विरोध प्रदर्शन 

शहर में हुए छोटी बच्ची के साथ बलात्कार के विरोध-प्रदर्शन हेतु विपक्षी  पार्टी ने पाँच-पाँच सौ रूपये में झोपड़-पट्टी में रहने वाले परिवारों की महिलाओं को छह घंटे के लिए किराये पर लिया था . विपक्ष के पार्टी कार्यालय से पार्टी द्वारा वितरित वस्त्र धारण कर व् हाथों में बैनर लेकर दिए गए नारे लगाते हुए महिलाओं का काफिला सरकार की मुखिया के आवास की ओर बढ़ लिया . तभी उसमे सबसे जोर से नारे लगा रही कार्यकर्ती के मोबाइल की घंटी बजी .उसने सोचा जरूर पांच नंबर के बंगले वाली मोटी का फोन होगा .कह दूँगी आज बच्चा  बीमार है कल को आउंगी . पर कॉल घर से थी .उसने रिसीव करते हुए पूछा -''क्यों किया बबली फून ?'' बबली हकलाते हुए बोली -'' मम्मी वो भाई ने हैण्ड  पम्प पर पानी भरने आई सुमन का दुपट्टा खीचकर खुलेआम उसके साथ छेड़छाड़ कर दी .बहुत पब्लिक इकट्ठी हो गयी है .भाई बहुत पिटेगा आज ! जल्दी आजा मम्मी !'' कार्यकर्ती जोश में बोली -'बबली तू चिंता न कर ...देंखूं कौन हाथ लगावे है मेरे बेटे  को ? ससुरी इस सुमन में धरा क्या है ? मैं दस मिनट में पहुँचरी बबली ..तू घबरावे ना !'' ये कहकर कार्यकर्ती काफिले से अलग होकर अपने इलाके की ओर बढ़ चली !


शिखा कौशिक 'नूतन'

मंगलवार, 13 जनवरी 2015

सच्चा प्यार-नेशनल दुनिया में प्रकाशित


नेशनल दुनिया में प्रकाशित 

''कल को इस रिवाल्वर की    छह की छह गोलियां उस धोखेबाज़ लड़की  के  सीने  में    उतार   दूंगा ....मुझसे धोखा  ..मेरे  दिल  से  धोखा  ...मेरे  प्यार  से  धोखा  ...जिसने  उसे  दुनिया  की हर  चीज़  ..हर रिश्ते  से  ज्यादा  चाहा  उससे  धोखा  ...नहीं  बर्दाश्त  करूंगा  ये  धोखा . माँ-पापा तक से बोल  दिया  था  मैंने  कि अगर  शादी  करूंगा तो केवल ''कामना'' से और वो  अपने  पिता के आगे झुक  गयी . क्या  कह रही थी आखिरी  मुलाकात  में ....हां  . ..यही  कि  ' अपने  कारण अपने पिता को मरते नहीं देख सकती ' ये सब उसने  तब  क्यूँ नहीं सोचा  जब वो उससे नज़दीकियां बढ़ा रही थी। मेरे दिल को खिलौना बनाकर खेलती रही और अब शादी किसी और से...............नहीं .....................उसे भी नहीं छोड़ूंगा जो मेरी कामना को मुझसे अलग करने की कोशिश करेगा ...............सब को निपटा दूंगा ......कामना का पिता  हो या उसका होने वाला दूल्हा या फिर कामना '' बाईस वर्षीय पुष्पक ने ये कहते-कहते बायीं हथेली की उँगलियाँ कसते हुए मुट्ठी बनाई और सामने रखी मेज पर दे मारी। दायें हाथ में पकड़ी हुई रिवाल्वर को फिर से खूनी इरादों के साथ  देखा और  अपने बैड के गद्दे के नीचे छिपा दिया . रविवार का दिन था और दीवार घडी  में दोपहर के दो बज  रहे  थे  .खौलते दिल को पुष्पक ने  शांत किया और सामान्य भाव चेहरे पर लाकर अपने कमरे  के किवाड़ खोलकर बाहर  निकला .निकलते हीउसने पाया कि  उसकी सोलह वर्षीय बहन टीना किवाड़ों के पास रखे गमले की निराई-गुड़ाई में लगी हुई है .पुष्पक झूठी मुस्कराहट के साथ मीठी जुबान में बोला -'' अरे यहाँ क्या  कर रही  है तू  .....माँ  के साथ रसोई के काम में हाथ  बटाया  कर .'' टीना प्रतिउत्तर में मुस्कुराते हुए बोली -'' जी भैय्या ''  पुष्पक को तसल्ली  हुई कि टीना उसके चेहरे के बनावटी भावों को पहचान नहीं पाई  .पुष्पक के वहां से एक कदम आगे बढ़ाते ही टीना चहकती हुई बोली -''भैय्या आपका कमरा साफ कर दूँ ...बहुत बिखरा-बिखरा सा पड़ा है ..बैड की चद्दर भी बदल दूँगी ...बहुत गन्दी लग रही है ..'' टीना के ये कहते ही पुष्पक हड़बड़ा गया पर खुद को संभालते हुए बोला -'' नहीं ..आज रहने दे ..जा ..जाकर माँ का हाथ बंटा या फिर पढ़ाई कर और माँ व् पापा मेरे बारे में पूछें तो कह देना मैं विवेक के यहाँ जा रहा हूँ  .'' ये कहकर वो तेज़ी से में गेट की ओर  बढ़ा ही था कि पीछे से पापा की  कड़कती आवाज़ सुनकर उसके पैर  ठिठक गए .पीछे मुड़कर देखा तो पापा हाथ में उसका ही रिवाल्वर उसकी ओर ताने खड़े थे .पुष्पक के होश उड़ गए .एकाएक हज़ारों प्रश्न उसके दिमाग में तूफ़ान की रफ़्तार से दौड़ने लगे -''पापा के पास मेरा रिवॉल्वर कैसे आया ? किसने बताया पापा को मेरे इरादों के बारे में ?..तो क्या टीना मेरी जासूसी कर रही थी ?'' ये सोचते सोचते वो खिसियाता  हुआ पापा के करीब पहुँच गया और हकलाता हुआ बोला -'' ये तो रिवॉल्वर है पर आपके पास कैसे ?'' पापा ने पास खड़ी टीना को रिवॉल्वर पकड़ाते हुए पुष्पक के कंधे पर नरमाई से हाथ रखते हुए कहा -'' यही तो मैं पूछना चाहता हूँ बेटा कि एम.बी.ए. के इतने बुद्धिमान छात्र के बैड के गद्दे के नीचे ये लोडेड रिवॉल्वर कैसे,  क्यों और कहाँ से आया ?'' पुष्पक पसीना-पसीना होते हुए बोला- ''पापा ..प्लीज़ फॉरगिव मी   ....आई हैव डन  बिग मिस्टेक  .'' ये कहते-कहते वो पापा के चरणों में गिर पड़ा .पापा ने उसे प्यार से उठाते हुए कहा गले से लगा लिया और रुद्ध  गले से बोले  -'' देख  किंचन   की चौखट  पर खड़ी तेरी माँ रोये  जा रही है ..पहले उससे जाकर माफ़ी  मांग  .'' पुष्पक दौड़कर  माँ के पास पहुंचा  और उससे लिपट  कर रोने लगा .माँ ने उसका चेहरा  हथेलियों में भरते हुए प्यार से कहा -''नहीं बेटा ऐसे काम नहीं करते ...तू तो एक तितली तक को पकड़ना पाप मानता है फिर किसी  लड़की को गोली मारने की बात कैसे सोच ली ...चल अब चुप हो जा ..रो मत ..भगवान ने सब समय से ठीक  कर दिया .'' ये कहते हुए माँ ने अपने आँचल  से उसके चेहरे पर आये आंसुओं को पोंछ दिया .पापा व् टीना भी वहीँ आ पहुंचे .पापा बोले -'' पुष्पक जाओ फ्रेश होकर आओ ..दीपक आता ही होगा .'' पुष्पक चौंकता हुआ बोला-''दीपक !!!'' पापा उसकी जिज्ञासा शांत करते हुए बोले- ''हां ! दीपक ...वही दीपक जिसके गाल पर जोरदार तमाचा मारकर तुमने कॉलेज कैंटीन  में दोस्तों के सामने अपमानित किया था   ..नो मोर क्वेश्चन प्लीज़ .'' पापा के ये कहते ही पुष्पक वहां से फ्रेश होने चला गया और जब फ्रेश होकर ड्राइंग रूम में आया तब दीपक को सोफे पर पापा के पास विराजे पाया .पुष्पक को देखते ही दीपक सोफे से खड़ा होते हुए बोला -'' हैलो पुष्पक ..कैसे हो ?'' पुष्पक अपने पूर्व में किये गए दुर्व्यवहार पर लज्जित होते हुए बोला-'' सॉरी दीपक ..उस दिन की अपनी बदतमीज़ी के लिए माफ़ी मांगता हूँ ..सच में शर्मिंदा हूँ मैं !''
दीपक ने आगे बढ़कर उसे गले लगा लिया और सोफे पर अपने ही पास बैठाते हुए बोला -'' इट्स ओ.के.  ..दोस्ती-यारी में सब चलता है .'' दीपक की इस बात पर पापा कुछ  गंभीर  होते हुए बोले -'' नहीं बेटा तुमने सच्ची मित्रता निभाई है और एक उज्जवल भविष्य वाले छात्र को हत्यारा बनने से बचाया है .यदि तुम हमें पुष्पक की मनोस्थिति की सूचना न देते तो कल मेरा बेटा हत्यारा बन जाता जबकि मैं जानता हूँ कि वो ऐसा केवल भावावेश में करता .'' पुष्पक पापा की  बात पर हैरान होता हुआ बोला -'' क्या दीपक ने रिवॉल्वर के बारे में आपको बताया ....पर इसे कैसे पता चला ..मेरी  तो इससे उस दिन के बाद से ही बोल- चाल  बंद है ..'' पापा ने  पुष्पक  की ओर देखते हुए कहा -'' जिस दिन तुमने कॉलेज कैंटीन में दीपक के ये सुझाव देने पर कि ''कामना को भूल जा '' के जवाब में उसके गाल पर तमाचा रसीद किया था उस दिन से ही दीपक का दिमाग तुम्हारा जूनून  देखकर ठनक गया था कि तुम कोई न कोई गलत कदम जरूर उठोगे .गन -हाउस वाले विवेक से तुम्हारा मित्रता बढ़ाना ,तुम्हारा क्लासेस बैंक करना सब दीपक नोट कर रहा था .कुछ दिन पहले जब कामना ने दीपक को अपनी  शादी के फंक्शन हेतु इन्वाइट किया तब दीपक ने मेरे ऑफिस आकर मुझे तुम्हारी मनोस्थिति से अवगत  कराया  .मैंने टीना को तुम्हारी जासूसी पर लगाया और तुम एक अपराधी बनते-बनते रह गए .बेटा ये ठीक है कि  तुम  कामना से बहुत प्यार करते हो पर कई बार परिस्थितियां ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ी कर देती हैं कि व्यक्ति जिसे चाहता है वो उसे नहीं मिल पाता  .ऐसे में व्यक्ति को धीरज से काम लेना चाहिए और जिसे वो दुनिया कि हर चीज़..हर रिश्ते से ज्यादा अहमियत देता आया है .उसे मिटाने  नहीं उसके खुशहाल जीवन की कामना करनी चाहिए .हो सकता है कामना को तुमसे भी ज्यादा प्यार करने वाला जीवन-साथी मिल रहा हो .तुम भी तो उसे जीवन भर खुश रखने की कसमें  खाते  आये होगे फिर कैसे इतना प्रतिशोध तुम्हारे दिल में भभक उठा !मैं मानता हूँ कि इन हालातों को सहना सरल नहीं पर बेटा यदि तुम जिससे प्यार करते हो उसके लिए इतना सा त्याग भी नहीं कर सकते तब माफ़ करना ये कहना पड़ेगा कि तुम्हारा प्यार सच्चा प्यार नहीं है .प्यार यदि दैहिक-मिलन में ही होता तो शायद इतना पवित्र भाव न कहलाता .ये तो आत्मिक भाव है जो मानव को भगवान बना देता है !'' पुष्पक की  आँखें भर आई .उसने दीपक का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा-'' यार तूने मेरी ज़िंदगी पर...नहीं नहीं आत्मा पर  लगने वाले कलंक से मुझे बचा लिया .कल जब तू कामना के विवाह-समारोह में शामिल हो तब एक बुके मेरी ओर से भी उसे भेंट करना और कहना कि मैं केवल उसे खुश देखना चाहता हूँ .'' पुष्पक के ये कहते ही टीना नम आँखों के साथ चहकती हुई बोली -''दैट्स लाइक माई ब्रदर ...आई प्राउड ऑफ  यू भैय्या !'' पुष्पक भी मुस्कुरा दिया .अब पुष्पक के ह्रदय में धधक रही प्रतिशोध  की  ज्वालायें शांत हो चुकी थी और वहां त्याग की ठंडी फुहारें बरस रही थी .

शिखा कौशिक 'नूतन'

शनिवार, 3 जनवरी 2015

बहन मिल गयी -लघु कथा

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रोहित ,प्रभात और चिराग कोचिंग से लौट रहे थे .प्रभात की नज़र तभी सुनसान पड़ें खाली प्लॉट में चार लड़कों से घिरी  मदद के लिए पुकारती लड़की पर गयी .प्रभात ने अपना बैग कंधें से उतार कर सड़क पर फेंका और ''मेरी बहन को छोड़ दो कमीनों '' कहता हुआ उसी दिशा में दौड़ पड़ा .रोहित और चिराग प्रभात की बात सुनकर अपना बैग वहीँ फेंककर उसके पीछे दौड़ पड़े .तीन लड़कों को गुस्से में दौड़कर अपनी ओर आते देख वे चारों  लडकें लड़की को छोड़कर भाग लिए .उनमे से केवल एक ही को प्रभात पकड़ पाया और फिर वही पहुंचे रोहित व् चिराग ने उसकी  जमकर लातों -घूसों से खातिरदारी  कर दी .वो भी किसी  तरह खुद को छुड़ाकर भाग निकला .प्रभात को  उस पीड़ित लड़की  से उसका नाम-पता पूछते देखकर चिराग ने प्रभात से पूछा -''अबे तू तो ये कहकर भागा था मेरी बहन को छोड़ दो ...ये तेरी बहन नहीं है ...यूँ ही अपने साथ हमारी जान भी दांव पर लगा दी !!'' प्रभात मुस्कुराता हुआ बोला -'' मैं ऐसा न करता तो सालों तुम बहाना बनाकर निकल लेते और हम भाइयों के होते एक बहन की अस्मत लुट चुकी होती .'' रोहित प्रभात की बात सुन मुस्कुराता हुआ बोला -'' कुछ भी कहो ..मुझे भगवान ने कोई बहन नहीं दी थी आज प्रभात के कारण एक बहन मिल गयी .'' रोहित की बात सुनकर प्रभात ने उसे गले लगा लिया और पीड़ित लड़की की आँखे भर आई .

शिखा कौशिक 'नूतन'