स्कूल में भोजनावकाश के समय कक्षा पांच के तीन विद्यार्थी राजू ,सोहन व् बंटी ने अपने टिफिन बॉक्स खोले और निवाला मुंह में रखते हुए राजू बोला-''...पता है सोहन मेरे पापा को मेरी बहन बिलकुल पसंद नहीं .पापा कहते हैं कि यदि उसकी जगह भी मेरे भाई होता तो हमारा परिवार पूरा हो जाता .कल हम दोनों में लड़ाई हो गयी .मेरी गलती थी ....पर पापा ने मेरी बहन के गाल पर जोरदार तमाचा लगाते हुए कहा-शर्म नहीं आती अपने भाई से लडती है !''.....सोहन बोला-''मेरे पापा तो तुम्हारे पापा से भी बढ़कर हैं कल माँ से कह रहे थे -''यदि इस बार लड़की पैदा की तो घर से निकाल दूंगा तुझे ..तुम तो जानते ही हो मेरे पहले से ही तीन छोटी बहने हैं .''.....उन दोनों की बात सुनकर बंटी बोला -''...पर मेरे पापा तुम दोनों के पापा से बढ़कर हैं .मेरी माँ के पेट में ही जुड़वाँ बहनों को परसों ख़त्म करवाकर आये हैं .ये तो अच्छा हुआ कि मैं लड़का हूँ वरना वे मुझे भी जन्म न लेने देते ....'' तभी भोजनावकाश की समाप्ति की घंटी बजी और
तीनों अपनी अपनी सीट पर जाकर बैठ गए .
शिखा कौशिक
2 टिप्पणियां:
जागरूकता की यही उम्र होती है...पर अफ़सोस हमारे पाठ्यक्रम में ये बातें नहीं होतीं...बच्चे अपने परिवेश से सीखते हैं...खूबसूरत रचना...
.ये तो अच्छा हुआ कि मैं लड़का हूँ वरना वे मुझे भी जन्म न लेने देते,...
बहुत अच्छी भावपूर्ण प्रस्तुति,....
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