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बुधवार, 9 मई 2012

''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!-A SHROT STORY

''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!-A SHROT STORY 

'संतरेश  की माँ यहाँ आ   ...'' पति सत्तो   की  कड़क   आवाज़  पर बर्तन    मांजती    सुशीला    धोती  के पल्लू  से हाथ पोछती हुई रसोईघर से निकल  आँगन में  पड़ी खाट  पर बैठे पति  के पास आकर जमीन पर उकडू बैठ गयी .संतरेश  का  बाप  अंगूठे व् तर्जनी से पकड़ी हुई बीडी को मुंह   से निकालते  हुए  बोला  -''कल्लू  मिला  था  ...कह  रहा  था  सत्रह  की हो   गयी तेरी  लौंडिया  ..ब्याह  न  करेगा  ?''...मैं बोला तू ही बता  ...तो बोला ..''तीन  हज़ार  dene को taiyar है पास  के gauv   का सुक्खू   ...उम्र भी बस   चालीस   के आस   पास  है .मैं बोला तीन  तो कम हैं  ...इतना तो छोरी  ही कमा  लावे है काम  करके इधर उधर से ....फिर वो बोला 'अच्छा kal    को बताऊंगा  सुक्खू से बात करके ...''...इब तू बता  के कहवे ?'' सुशीला मुंह बनती  हुई बोली -''धी का जन्म तो होवे ही है नरक भोगने को ...जितने में चाहवे कर दे ..मैं कुछ  बोल के क्यों खोपडिया  पे जूत लगवाऊँ ....'''ये कहकर  सुशीला बर्तन  धोने  फिर  से  रसोईघर  को  चली  गयी  .दो दिन बाद संतरेश की शादी सुक्खू के साथ  हो गयी .विदाई  के समय सुशीला की आँख में आंसू  थे और सत्तो रूपये  गिनते  हुए  मन में सोच रहा था कि-''ये तो घाटे का सौदा रहा ''!!!
                                                -shikha  kaushik  

रविवार, 6 मई 2012

मेरे पापा .. तुम्हारे पापा से भी बढ़कर हैं-a short story




   स्कूल  में  भोजनावकाश  के  समय  कक्षा  पांच  के तीन  विद्यार्थी  राजू ,सोहन व् बंटी ने अपने टिफिन बॉक्स खोले और निवाला  मुंह में रखते हुए राजू बोला-''...पता है सोहन मेरे पापा को  मेरी  बहन बिलकुल पसंद  नहीं .पापा कहते हैं कि यदि उसकी जगह भी मेरे भाई होता तो हमारा  परिवार पूरा हो जाता .कल हम दोनों में लड़ाई हो गयी .मेरी गलती थी ....पर पापा ने मेरी बहन के गाल पर जोरदार  तमाचा लगाते हुए कहा-शर्म नहीं आती अपने भाई से लडती है !''.....सोहन बोला-''मेरे पापा तो तुम्हारे पापा से भी बढ़कर हैं कल माँ से कह रहे थे -''यदि इस  बार लड़की  पैदा  की तो घर   से  निकाल दूंगा तुझे  ..तुम  तो जानते  ही  हो मेरे पहले  से ही  तीन छोटी  बहने    हैं .''.....उन    दोनों की बात  सुनकर  बंटी बोला -''...पर मेरे पापा तुम   दोनों के पापा से बढ़कर हैं .मेरी माँ के पेट     में ही  जुड़वाँ  बहनों  को परसों  ख़त्म  करवाकर  आये  हैं .ये  तो अच्छा  हुआ   कि मैं  लड़का  हूँ  वरना  वे  मुझे  भी जन्म न  लेने   देते   ....''  तभी   भोजनावकाश   की समाप्ति  की घंटी  बजी  और 
तीनों  अपनी  अपनी  सीट   पर जाकर  बैठ   गए  .
                 शिखा कौशिक  

शुक्रवार, 4 मई 2012

लघु कथा- ''माँ मैं इसलिए बच गया ''

लघु कथा- ''माँ मैं इसलिए बच गया ''



Dog : Pomeranian dog isolated on a white background Stock Photo
गूगल से  साभार 


सब्जी मंडी में अचानक रूपाली का चार वर्षीय  बेटा अर्णव ज्यों ही उससे हाथ छुड़ाकर भागा  तो  रूपाली का सारा ध्यान अर्णव की  ओर  चला गया . अर्णव ने तेजी  से भागकर एक पिल्ले को नाले में गिरने से बचा लिया .इसके बाद अर्णव रूपाली की ओर दूर से ही मुस्कुराता हुआ दौड़कर आने लगा कि तभी एक तेज़ रफ़्तार से   आती   बाईक  को   देखकर रूपाली सिहर  उठी  .अर्णव उसकी  चपेट  में आ   ही  जाता तभी एक युवक ने तेज़ी से आकर  अर्णव को अपनी  ओर खींच  लिया और...एक हादसा होने से बच गया .रूपाली भागकर उस युवक के पास  पहुंची  और उसका शुक्रिया  अदा  किया  फिर  अर्णव को अपनी बांहों में भरकर रो   पड़ी .अर्णव मासूमियत से माँ के आंसू  पोछते   हुए  बोला -''माँ मैंने उस पिल्ले को बचाया  था  न  नाले में गिरने से उसी तरह इस भईया ने मुझे उस बाईक से बचा लिया .मैं इसी  लिए बच गया .वो  देखो  वो प्यारा  सा  पिल्ला   कैसे पूंछ   हिला  रहा है !'' रूपाली ने रुधे गले से ''हाँ बेटा '' कहा और उसका हाथ पकड़कर सब्जी लेने के लिए दुकान की ओर चल दी .

                                                                                              शिखा कौशिक 
                                                                                      [मेरी कहानियां ]

रविवार, 1 अप्रैल 2012

पूनम युग और बेटियों को संस्कार -A SHORT STORY

पूनम युग और बेटियों को संस्कार 

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गूगल से साभार 
''मम्मा ....ये  देखो ....हा !शेम शेम !''यह कहकर रुमा की   पांच वर्षीय बिटिया टिन्नी ने  अपनी नन्ही नन्ही हथेलियों  से  अपना  मुंह ढक लिया  .रुमा ने उसके  हाथ  से अख़बार  की मैगजीन  लेकर देखी तो तो उस पर पूनम पांडे  की सेमी न्यूड  फोटो छपी  थी ...रुमा ने तुरंत मैगजीन मोड़कर रख दी और टिन्नी का ध्यान मेज पर रखे  गुलदस्ते  के फूलों की ओर लगाते हुए पूछा-''टिन्नी बताओं ...कौन सा फूल सबसे प्यारा है ?''...टिन्नी ने तुरंत गुलाब के फूल  को  छू दिया ..तभी उनका डौगी टुकटुक टिन्नी के पास आकर पूंछ  हिलाने लगा और तिन्नी  उसे  लेकर फुदकती हुई वहां से गार्डन की ओर चली गयी .....लेकिन  टिन्नी फिर से दौड़कर  रुमा के पास आकर अपनी कोमल हथेलियों  से उसके हाथ पकड़ते हुए बोली -''ममा.. उन आंटी ने कपडे क्यों नहीं पहने ?''रुमा के मन में आया -''इस पूनम पांडे  के गोली मार दू !!...अब क्या जवाब दू बच्ची को ?''तभी उसे एक जवाब सूझा.वो बोली -''बेटा   ..वो बहुत  गरीब है ....उसके पास कपडे नहीं हैं ....कल  ही भेज दूँगी ..''....इस बार टिन्नी संतुष्ट नज़र आई और रुमा ने राहत की साँस लेते हुए मन ही मन कहा -''हे भगवन  .....इस पूनम युग में बच्चियों की माताओं  को साहस  दो कि वे अपनी बेटियों में संस्कार भर सकें !''

                                                   शिखा कौशिक 

बुधवार, 28 मार्च 2012

''बेटी की माँ ''-a short story

 ''बेटी की  माँ  ''

Happy Mothers Day Song - I Love You Mommy Mothers Day Song For Children
सभी फोटोस गूगल से साभार 


Germany, Cologne, Mother and daughter (4-5) head to head, portrait, close-up Photo (WESTF14285)Germany, Cologne, Mother and daughter (4-5), mother touching nose, smiling, portrait Photo (WESTF14282)Germany, Cologne, Mother and daughter (4-5) head to head, portrait, close-up Photo (WESTF14284)

आठ साल की प्रिया अपनी सहेली के घर खेलने गयी हुई थी .जब शाम ज्यादा हो गयी तब सुनीता को प्रिया की चिंता सताने लगी .सुनीता ने बाल ठीक  किये और घर का ताला लगा रीना के घर की ओर चल दी .एक एक कदम रखते हुए बस यही ख्याल सता रहा था कि -''मेरी बिटिया  के साथ कुछ गलत न  हो जाये !.....प्रिया बता रही थी कि रीना कि मम्मी  बाहर  सर्विस  करती हैं ..यहाँ केवल  रीना व्  उसके  पापा  रहते    हैं ....आदमियों  का क्या  भरोसा   ?...मैं  भी   कितनी   पागल    हूँ   प्रिया को जाने  दिया   ...हे  देवी  मैय्या !    मेरी बिटिया  की रक्षा  करना  !कहीं  रीना के घर से लौटते  हुए कुछ न हो गया   हो ....प्रिया आज   सही   सलामत   मिल   जाये ...बस आगे   से उसे इतनी देर के लिए ऐसी जगह नहीं जाने दूँगी "'ये सोचते  सोचते  सुनीता  ने कस कर अपनी मुठ्ठी  भींच ली  ..तभी उसे सामने से प्रिया.. रीना व् रीना   के पापा आते दिखाई दिए .प्रिया को देखकर सुनुता की जान में जान आ गयी .सुनीता ने रीना के पापा का शुक्रिया अदा किया .वे वही  से लौट गए .सुनीता ने घर पहुंचकर प्रिया के गाल पर तमाचा जड़  दिया और उसे डांटते   हुए   बोली   ''....कोई जरूरत नहीं है   किसी के घर जाने की ...लड़कियों का घर से बाहर ज्यादा घूमना ठीक नहीं ...''सुनीता ने यह कहते  हुए ही प्रिया को बांहों में भर लिया और मन में सोचा -'''एक बेटी की  माँ को ऐसा ही बनना   पड़ता    है  !''


                                     शिखा कौशिक 
                           [मेरी कहानियां ]

सोमवार, 26 मार्च 2012

'' वही बहू अच्छी ! ''


सुशीला  के बेटे का ब्याह हाल ही में हुआ था .मोहल्ले में शोर था कि बहू इत्ता दहेज़ लाई है कि घर में रखने तक की जगह नहीं बची . .जेवर   ..लत्ता कपडा   इत्ता लाइ है  कि क्या कहने ...!''उषा ने सोचा  ''....''मिल  ही आती हूँ सुशीला से और बहू भी देख आऊं ...हरिद्वार न गयी होती तो ब्याह में जरूर शामिल होती .......कितनी आस थी  ...मेरी बहू भी खूब दहेज़ लाये ...चार में बैठ कर गर्दन ऊँची करके कहती मेरे मुकेश की ससुराल.....पर क्या ?मुकेश ने सब मटियामेट कर दिया ...खुद ही ब्याह लाया ....एक चाँदी का सिक्का और दो जोड़ी कपडे .....सारी बिरादरी में नाक कटवा दी ....''.यही सब सोचते हुए उषा अपने कमरे में गयी और एक नयी धोती पहन कर तैयार हो गयी सुशीला के यहाँ जाने के लिए .कुछ रूपये ''बहू के मुंह dikhai '' हेतु लेकर रसोईघर में काम कर रही मुकेश की बहू सरिता से यह कहकर कि -''बहू..जरा सुशीला के यहाँ जा रही हूँ...मुकेश और उसके पिता जी दुकान से लौट आये तो मेरा इतज़ार   किये  बगैर  चाय बना लेना  ..मुझे देर हो सकती है वहां ...''ज्यों ही उषा ने चौखट के बाहर पैर रखा चौखट के आगे पड़ी लाहौरी ईट पर पड़ा और उसका पूरा पैर मुड़ गया ....वो ''हाय राम...''कहकर चीखी व् पैर पकड़कर वहीँ बैठ गयी .तेज दर्द के कारणउसकी आँख में आंसू भर आये .सासू माँ की चीख सुनकर सरिता सारा काम छोड़कर तेजी से भागी आई .सासू माँ को दर्द से तड़पते देख उसकी भी आँख भर आई .घर के आगे से जाते पडोसी रमेश की मदद से सरिता सासू माँ को उनके कमरे  तक ले आई और उन्हें पलंग  पर लिटाकर हल्दी का दूध बना लाई. ....फिर ऐसी तरकीब से सासू माँ का पैर मरोड़ा  की चट-चट करती सारी नसें खुल गयी और उषा के  पैर में आई मोच व् दर्द दोनों ठीक हो गए .उषा ने सरिता को लेट लेटे ही इशारे से अपने पास बुलाया और थोडा सा उठकर उसके माथे को चूम लिया ..फिर मुस्कुराकर बोली ..''मुकेश है तो मेरा ही बेटा ...ऐसी बहू लाया है कि लाखों क्या..करोड़ों में भी न  मिले ..''सासू माँ से तारीफ सुनकर सरिता मुस्कुरा  दी .उषा ने मन  ही मन सोचा -''करोड़ों का दहेज़ भी ले आती तो क्या होता ....जो दुःख दर्द में बेटी  की तरह सेवा कर सके वही बहू अच्छी !'' 
शिखा कौशिक 

गुरुवार, 15 मार्च 2012

तेरे ही कर्म -A SHORT STORY


गूगल  से साभार 
 

    बयालीस   वर्ष   की   आयु   में   अचानक  ह्रदय गति   रुक  जाने  से   मृत्यु    को    प्राप्त   चपल   ने   भगवान   के   दरबार   में   पहुचकर    पूछा  - ''हे   प्रभु   मेरे   साथ   ये   अन्याय   क्यों   किया   ?मेरा   परिवार   -मेरे  बच्चे  सब  अनाथ   हो  गए  .''प्रभु  व्यंग्ययुक्त   स्वर  में  बोले    -''मूर्ख  आज  से दस  साल पहले जब  तू   भीषण   दुर्घटना   में  भी   बाल  -बाल  बच   गया   था  तब  तेरा  ही  एक  सत्कर्म  तेरी  रक्षा  कर  रहा  था  .तूने  एक  गरीब  किसान  की  जमीन   महाजन  के  चंगुल  में  जाने से बचवाई  थी  पर  अब  तू  घर  में  बैठे  बैठे  ही  इस  तरह  इसलिए  मर  गया  क्योंकि   तेरा  एक  दुष्कर्म  तेरे  सब  पुण्यों     को लील   गया  तूने  एक  गरीब  से भी  रिश्वत    ले ली  जबकि  उसकी  पत्नी  दवाई  के  पैसे  न  होने  के  कारण   बीमारी  में  चल  बसी  .मैं  न  तो   किसी    के  साथ  न्याय  करता  हूँ  और  न  अन्याय  ..ये  तेरे  ही  कर्म  होते  हैं  .यमदूतों -   इसे  नरक  में  छोड़  आओ  !''प्रभु  ऐसा   आदेश   देकर   अंतर्ध्यान  हो  गए  .
                                                                शिखा कौशिक