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रविवार, 18 अगस्त 2013

बेटी पराई -लघु कथा

Indian_bride : Series. young beautiful brunette in the indian national dress
बेटी पराई -लघु कथा 
वैदेही  के घर की चौखट पर कदम रखते ही सासू माँ चहक कर बोली -'' लो आ गयी बहू ....अब बना देगी चाय झटाझट  आपकी .''  वैदेही ने मुस्कुराकर सासू माँ की ओर देखा और पल्लू सिर पर ठीक करते हुए तेज कदमों से अपने बैडरूम की ओर बढ़ ली .पर्स एक ओर रखकर सैंडिल उतारी और किचन की ओर  चल दी .ससुर जी की चाय बनाते समय वैदेही को माँ की याद आ गयी .परीक्षा देकर लौटती  तो माँ कहती -''....अरे आ गयी वैदेही ..अच्छी परीक्षा हुई ...मेरी फूल सी बिटिया तो मुरझा ही गयी ...वैदेही मुंह हाथ धो ले मैं तेरे लिए तुलसी की चाय बनाकर लाती हूँ ''' .....पर यहाँ ससुराल में ये ठाट कहाँ ?ऑफिस जाते समय भी सब काम निपटा कर जाओ और लौटकर आते ही काम में जुट जाओ .पिछले महीने जब वंदना ननद जी एम्.ए. की परीक्षा देने  आई थी तब सासू माँ में भी माँ की छवि दिखाई दी थी ...ठीक माँ की तरह  ननद जी के लिए सासू माँ चाय बना लाती थी उनके परीक्षा देकर लौटते  ही ...पर बहू को चाय बनाकर देने में तो मानो नाक कट जाती है सास की .''  वैदेही के ये सब सोचते सोचते ही चाय में उबाल आ गया और वैदेही कप में छनकर ट्रे में कप-प्लेट रखकर ससुर जी के लिए चाय लेकर चली .ससुर जी को चाय पकड़ाकर वैदेही किचन की ओर लौट ही रही थी  कि सासू माँ ने अपने कमरे से आवाज़ लगा दी -'' बहू ...बहू वैदेही यहाँ आना !'' वैदेही के कदम उस ओर ही बढ़ चले .सासू माँ बैड पर कुछ जेवर लिए बैठी थी .वैदेही के वहां पहुँचते ही धीमी आवाज़ में बोली -'' वैदेही ...अब इस घर की मालकिन तू ही है .ये जेवर मेरी सास ने मुझे दिए थे ओर अब मैं तेरे हवाले इनको करके निश्चिन्त हो जाना चाहती हूँ .मेरे जीवन का कोई ठिकाना नहीं ओर हां इन जेवरों के बारे में भूलकर भी वंदना से जिक्र मत करना ..इस घर की बात दूसरे घर जाये ये ठीक नहीं ...मैंने वंदना के सामने कभी ये जेवर नहीं आने दिए ...बेटी तो  पराई होनी ही होती है ना .. यही  सोचकर छिपाया ,तुम भी ध्यान रखना '' वैदेही ने हाँ में गर्दन हिला दी और सोच में डूब गयी कि क्या मेरी माँ ने भी मुझसे ऐसी ही कई बातें छिपाई होंगी ?क्योंकि मुझे भी तो पराये घर ही आना  था !!!

शिखा कौशिक 'नूतन '


7 टिप्‍पणियां:

Shalini Kaushik ने कहा…

betiyon ke prati samaj kee soch ko darshati sundar laghu katha hamesha kee tarah .

Ramakant Singh ने कहा…

.इस घर की बात दूसरे घर जाये ये ठीक नहीं ...मैंने वंदना के सामने कभी ये जेवर नहीं आने दिए ...बेटी तो पराई होनी ही होती है ना .. यही सोचकर छिपाया ,तुम भी ध्यान रखना '' वैदेही ने हाँ में गर्दन हिला दी और सोच में डूब गयी कि क्या मेरी माँ ने भी मुझसे ऐसी ही कई बातें छिपाई होंगी ?क्योंकि मुझे भी तो पराये घर ही आना था !!!

सुन्दर सन्देश देती लघु कथा बेहतरीन

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बेटियाँ तो पराई होती है,,,
सुंदर कथा सृजन,,,
RECENT POST : सुलझाया नही जाता.

Ranjana Verma ने कहा…

बहुत अच्छी कहानी !!

राजेंद्र कुमार ने कहा…

बहुत ही सुंदर और सार्थक प्रस्तुती, आभार

Lalit Chahar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति! हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} की पहली चर्चा हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-001 में आपका सह्य दिल से स्वागत करता है। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा | सादर .... Lalit Chahar

Lalit Chahar ने कहा…

बहुत ही सुंदर और सार्थक प्रस्तुती, आभार! हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} की पहली चर्चा हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-001 में आपका सह्य दिल से स्वागत करता है। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा | सादर .... Lalit Chahar