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शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015

खोखली उदारवादिता -लघु कथा


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गौतम उदारतावादी स्वर में बोला -''लिव-इन कोई गलत व्यवस्था नहीं...आखिर कब तक वही पुराने..घिसे-पिटे सिस्टम पर समाज चलता रहेगा ..विवाह ....इससे भी क्या होता है ? गले में पट्टा डाल दिया बीवी के नाम का और मियां जी घूम रहे है इधर-उधर मुंह मारते हुए .'' सुरेश असहमति में सिर हिलाता हुआ बोला -'' भाई मुझे तो लिव-इन बकवास की व्यवस्था लगती है . दो दिन मौज मनाई और हो लिए अलग ....नॉनसेंस !'' गौतम उसकी हंसी उड़ाता हुआ बोला -'' ये.............ये ही है परंपरावादियों की कमजोरी ..साला आज कोई स्वीकार नहीं करेगा और बीस साल बाद कहेंगें ...लिव -इन ही ठीक व्यवस्था है .'' सुरेश कुछ कहना ही चाहता था कि अंदर से गौतम की पत्नी की आवाज़ आई -'' अजी सुनते हो ..जवान लड़की अब तक घर नहीं लौटी जरा देख कर तो आओ ...रात के नौ बजने आ गए !'' गौतम का चेहरा ये सुनते ही गुस्से से तमतमा उठा .वो भड़कता हुआ बोला -'' अब बता रही हो ..डूब कर मर जाओ ...अभी देखता हूँ ..क्या कहकर गयी थी वो ..कहाँ गयी है ?'' गौतम की पत्नी अंदर से ही बोली -'' कह रही थी शिवम के साथ थियेटर जाएगी ..कोई नाटक का मंचन है ...पर अब तक तो लौट आना चाहिए था !'' गौतम चीखता हुआ बोला -'' हद हो गयी ..मुझ से बिना पूछे ही किसी लड़के के साथ घूमने चल दी ...आज फिट करना ही होगा उसे .'' गौतम को भड़कते देख सुरेश उसे समझाते हुए बोला -'' थियेटर ही तो गयी है ..आ जाएगी ...ट्रैफिक का हाल तो तुम जानते ही हो ...अच्छा भाई मैं भी चलता हूँ !'' ये कहकर सुरेश गौतम के घर से निकल लिया और मन में  सोचने लगा -'' वाह भाई वाह ..लिव-इन ....लड़की का कुछ देर किसी लड़के साथ घूमना तक तो गंवारा नहीं और करते हैं लिव-इन की वकालत !!''

शिखा कौशिक 'नूतन'

सोमवार, 20 अप्रैल 2015

''रिक्शावाले का प्यार !''


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रविता सीमा से मिलने उसके घर पहुंची तो सीमा की ख़ुशी का ठिकाना न रहा . एक दुसरे का हाल-चाल पूछते पूछते रविता बोली - '' पता है सीमा मैं जिस रिक्शा से आई हूँ उसका चालक बहुत ही रोमांटिक है .एक से एक रोमांटिक सॉन्ग गाता है . आई एम इम्प्रेस्ड !'' इस पर दोनों ठहाका लगाकर हंस पड़ी . सीमा अपनी हंसी रोकते हुए बोली -'' कहीं तुम उसी रिक्शा वाले की बात तो नहीं कर रही जो अपनी रिक्शा को बहुत सजाये रखता है ?'' रविता हाँ में गर्दन हिलाते हुए बोली -'' हाँ..हाँ....वही तो ...!!'' सीमा रविता की हथेली अपनी हथेली में लेते हुए बोली ''अरे यार वो किसी लड़की को इम्प्रेस्ड करने के लिए नहीं गाता ये गाने ..उसे तो अपनी हर सवारी से प्यार है ..कल मेरी दादी जी उसी रिक्शा से आई थी .उन्होंने जब कल उस रिक्शा से उतरते हुए उस रिक्शा वाले से उसके रोमांटिक गाने गाने के बारे में  पूछा कि '' मैं क्या तुझे सोलह साल की नज़र आती हूँ तब उसने दादी जी से कहा था कि उसे तो अपनी हर सवारी से प्यार हो जाता है .चाहे वो दादी जी हो या दादाजी ....कोई युवती हो या कोई युवक ..उसके लिए सब बस एक सवारी हैं और वे ही उसका चढ़ता-उतरता प्यार हैं .'' रविता सीमा की इस बात पर मुस्कुराते हुए बोली -'' कुछ भी कहो लॉजिक है बन्दे की बात में .'' इस पर सीमा और रविता फिर से ठहाका लगाकर हंस पड़ी .

शिखा कौशिक 'नूतन'

शनिवार, 18 अप्रैल 2015

''जागरूक महिलाएं !''


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भावना को सब्ज़ी मंडी से लौटते  हुए अचानक अपनी सहेली अनु मिल गयी .इधर-उधर की बातों के बाद दोनों की बातों के केंद्र में दोनों के बच्चे आ गए .भावना मुंह बनाते हुए बोली - क्या बताऊँ ! मेरा बेटा आठ साल का है और फेसबुक पर दिन-रात पता नहीं अपनी गर्ल-फ्रेंड  से क्या चैट करता रहता है .मैं रोकती हूँ तो कहता है सुसाइड कर लूँगा !'' अनु बड़ा सा मुंह खोलकर ''हा !'' करती हुई बोली -'' क्या बताऊँ मेरी बेटी ने भी नाक में दम कर रखा है . मोबाइल पर  व्हाटस एप पर दिन भर आँख गड़ाए रहती है . अभी सातवें साल में है . पढ़ने को कहो तो बहाने बनाती है . तंग करके रख दिया है !'' भावना उसके सुर में सुर मिलाते हुए बोली - हां ये तो है .वैसे भी कितना टाइम हम बच्चों पर लगा सकते हैं .घर के काम के बाद कुछ शॉपिंग , किटी पार्टी और पसंद के सीरियल ..सब कुछ छोड़ दें क्या !'' अनु भावना का समर्थन करते हुए बोली -'' ...और क्या .हम कोई सिक्टीस -सवेन्टीस की माँ है क्या ? जिनकी अपनी लाइफ ही नहीं होती थी...सुबह से शाम तक बस बच्चे..बच्चे..बच्चे  ...आफ्टर ऑल ..हम आज की जागरूक महिलाएं हैं . ''

शिखा कौशिक 'नूतन'

गुरुवार, 16 अप्रैल 2015

''कॉलेज जाना है या शादी ब्याह में !''


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''माँ मैं कौन सी पोशाक पहनूं ?'' चिया ने चहकते हुए माँ से पूछा तो माँ ने उदासीन भाव से कहा -'' कुछ भी जो शालीन हो वो पहन लो . चिया ने आर्टिफिशल ज्वेलरी दिखाते हुए माँ से पूछा -'' माँ ये माला का सैट कैसा लगेगा मुझ पर ? माँ ने उड़ती-उड़ती नज़र चिया की ज्वेलरी पर डाली और सुस्त से स्वर में बोली -'' हां...............ठीक-ठाक ही है .'' चिया ने अपने लम्बे नाख़ून जो नेल पॉलिश से सजाये थे माँ की ओर करते हुए कहा - माँ देखो ना कैसे लग रहे हैं !'' माँ ने उखड़ते हुए कहा -'' क्या चिया ...कब से दिमाग खाए जा रही है ....पोशाक , ज्वैलरी ,नाखून ...बेटा एक बार कोर्स की किताबे भी देख ले ...कॉलेज जाना है तुझे कहीं शादी -ब्याह में नहीं ..समझी !'' चिया ने माँ की ओर चिढ़ते हुए देखा और आईने  के सामने के खड़ी  होकर बाल संवारने लगी .

शिखा  कौशिक  'नूतन '

बुधवार, 15 अप्रैल 2015

भगवान की गलती !


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सिया ने माँ से पूछा -'' मैं कालेज की फ्रेंड्स के साथ बाहर कैम्प में चली जाऊं माँ दो दिन के लिए ?'' माँ बोली -'' पिता जी से पूछो ? ''  सिया रसोईघर से कमरे में आई और पिता जी से पूछा कैम्प में जाने के लिए तो वे भड़क कर बोले -'' अरे  सिया की माँ ! तुम्हारी अक्ल पर पत्थर पड़ गए हैं जो बकवास बातों के लिए बेटी को मेरे पास मुझसे पूछने भेज देती हो . तुम्हे पता नहीं मैं इस सबके लिए कभी आज्ञा नहीं दूंगा !'' सिया की आँखों में पानी आ गया वो रोते हुए रसोईघर में चली गयी .सिया ने देखा माँ की आँखों में भी नमी थी .सिया को लगा उसने आज बहुत बड़ी गलती कर दी .उसके कारण माँ को भी पिता जी से डांट खानी पड़ी . तभी सिया का दो वर्ष छोटा भाई शोर मचाता हुआ घर में आया और पिता जी से बोला -'' पिता जी मुझे कालेज फ्रेंड्स के साथ बाहर जाना है कैम्प में .मैं चला जाऊं ? '' पिता जी मुस्कुराते हुए बोले -'' इसमें भी कोई पूछने के बात है बेटा ? इस उम्र में मस्ती नहीं करोगे तो क्या हमारी उम्र में करोगे .'' सिया ये सारा वार्तालाप सुनकर मन ही मन खुद को कोसते हुए बोली -'' गलती मैंने नहीं भगवान ने की है ...मुझे लड़की बनाकर .'' और माँ से लिपट कर फिर से रो पड़ी !

शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

''और फूल बिखर गया ''


''और फूल बिखर गया ''
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उस कँटीले जंगल में वो अल्हड़ सी कली निर्भीक होकर मंद-मंद आती समीर के साथ झूल लेती और जब हंसती तो उसके चटकने की मधुर ध्वनि से हर काँटा ललचाई नज़रों से उसे देखने लगता .वो खुद को पत्तों में छिपा लेना चाहती पर कहाँ छिप पाती !! फिर वो कली खिलकर फूल बन गयी .काँटों ने उसे धमकाते हुए कहा -'' हम तुम्हारी रक्षा करेंगें वरना कोई  तुमको तोड़ कर ले जायेगा ...ज्यादा मत मुस्कुराया करो ....न इठलाया करो .न चंचल पवन के झोंको से मित्रता रखो ...तुम कोमल सा एक फूल भर हो ...तुम पर भँवरे भी मंडराने आयेंगें .जो तुम्हारा रस चूसकर निर्लज्जता के साथ तुम्हारा उपहास उड़ाते हुए तुम्हें छोड़कर चले जायेंगें .फूल बनी वो कली उनकी बातें सुनकर सोच में पड़ गयी . ...घबरा गयी . उसका सौंदर्य घटने लगा .सर्वप्रथम उसकी सुरभि नष्ट हो गयी फिर पंखुड़ियों के रंग फीके पड़ने लगे .कली बने फूल  की पंखुड़ियां स्वयं पर लगी पाबंदियों के दुःख के कारण बिखरने लगी . अपने अंतिम क्षणों में कली बने फूल ने देखा कि काँटों ने भी उससे मुंह फेर लिया था .

शिखा कौशिक 'नूतन'

बुधवार, 8 अप्रैल 2015

''शायद यही प्यार है !''-लघु कथा

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रमन आज अपने जीवन के साठ वें दशक में प्रवेश कर रहा था . उसकी जीवन संगिनी विभा को स्वर्गवासी हुए पांच वर्ष हो चुके थे .रमन आज तक नहीं समझ पाया कि एक नारी की प्राथमिकताएं जीवन के हर नए मोड़ पर कैसे बदलती जाती हैं . जब उसका और विभा का प्रेम-प्रसंग शुरू हुआ था तब विभा से मिलने जब भी वो जाता विभा उससे पूछती -'' आज मेरे लिए क्या खास लाये हो ?'' और मैं मुस्कुराकर एक खूबसूरत सा फूल उसके जूड़े में सजा देता .विवाह के पश्चात विभा ने कभी नहीं पूछा कि मैं उसके लिए क्या लाया हूँ बल्कि घर से चलने से पहले और घर पहुँचने पर बस उसके लबों पर होता -'' पिता जी की दवाई ले आना , माता जी का चश्मा टूट गया है ..ठीक करा लाना ,  और भी बहुत कुछ ..मानों मेरे माता-पिता मुझसे बढ़कर अब विभा के हो चुके थे . बच्चे हुए तो बस उनकी फरमाइश पूरी करवाना ही विभा का काम रह गया -''बिट्टू को साईकिल दिलवा  दीजिये ....मिनी को उसकी पसंद की गुड़िया दिलवा लाइए ...'' रमन ने मन में सोचा  -'' मैं चकित रह जाता आखिर एक प्रेमिका से पत्नी बनते ही कैसे विभा बदल गयी .अपने लिए कुछ नहीं और परिवार की छोटी-से छोटी जरूरत का ध्यान रखना . शायद इसे ही प्यार कहते हैं जिसमे अपना सब कुछ भुलाकर प्रियजन से जुड़े हर किसी को प्राथमिकता दी जाती है .'' रमन ने लम्बी साँस ली और विभा की यादों में खो गया क्योंकि यही उसके जीवन के साथ वे दशक में प्रवेश का सबसे प्यारा उपहार था .

शिखा कौशिक 'नूतन'

मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

हम इंसान हो गए -लघु कथा


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हम इंसान हो गए -लघु कथा

खुशबू कालेज जा रही थी . बीच रास्ते में उसकी सेंडिल की हील निकल गयी . पीछे से आती एक बाइक रुकी .खुशबू ने मुड़कर देखा तो ये साहिल था .साहिल बाइक से उतरा और उसकी सेंडिल हाथ में लेता हुआ बोला -चलो इसे ठीक करा देता हूँ पास में ही एक मोची बैठता है .खुशबू थोड़ा लज्जित होते हुए बोली -अरे आप क्यों मेरे सेंडिल हाथ में लेते हैं किसी ने देख लिया तो क्या कहेगा कि नीच जाति की लड़की की सेंडिल एक ब्राह्मण लड़का हाथ से उठा रहा है .साहिल ठहाका लगाता हुआ बोला -'' चुप से चलती हो या तुम्हें भी उठाना पड़ेगा .'' इस घटना के दो साल बाद साहिल और खुशबू ने प्रेम-विवाह किया तब खुशबू साहिल को वरमाला पहनाते हुए बोली थी -'' आज से तुम मेरी नीच जाति के हो गए या मैं ब्राह्मण हो गयी ?'' साहिल ने उसकी वरमाला पहनते हुए कहा था -'' आज से हम इंसान हो गए .

डॉ.शिखा कौशिक 'नूतन'

रविवार, 5 अप्रैल 2015

अहंकार और प्यार -लघु-कथा

अहंकार और प्यार -लघु-कथा
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बैंक अधिकारी रजत ने ज्वेलरी की दुकान से डायमंड रिंग खरीदी और इस भाव से भरकर उस पर एक नज़र डाली कि-''कोई भी पति अपनी पत्नी के लिए वेडिंग ऐनिवर्सरी का इससे ज्यादा महगा गिफ्ट नहीं ले सकता !'' रजत घर पहुँचा तो उसने पाया उसकी वाइफ पायल ने आज सब कुछ अपने हाथों से उसके पसंद का बनाया था खाने में . उसने पायल के समीप पहुँच कर कहा -'' हाथ आगे करो ..मैं तुम्हें कुछ गिफ्ट देना चाहता हूँ !' पायल ने सकुचाते हुए हाथ आगे किया तो रजत ने पाया उसकी रिंग फिंगर पर पट्टी बंधी थी .रजत ने उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए पूछा -'' ये चोट कैसे लगी ?'' पायल मुस्कुराते हुए -'' अरे कुछ नहीं ..ये तो खाना बनाते हुए लग गयी ..आज बहुत दिन बाद आपके लिए कुछ बना रही थी ना ...नौकरों के कारण आदत ही नहीं रही कोई काम करने की !'' रजत ने डायमंड रिंग सकुचाते हुए पायल के आगे करते हुए कहा -'' ये छोटा सा गिफ्ट तुम्हारे लिए .'' और मन में सोचा -''पायल ने चोट लगने के बावजूद मेरे लिए मेरी पसंद का खाना बनाया इसमें उसका प्यार झलकता है और मेरे गिफ्ट में मेरा अहंकार ..उस प्यार के आगे इस मंहगे गिफ्ट का कोई मूल्य नहीं !''


डॉ.शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2015

''भाव ही सबसे सुन्दर ''-लघु कथा

''भाव ही सबसे सुन्दर ''-लघु कथा
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लड़के ने कहा 'तुम्हारी आँखें बहुत सुन्दर हैं !'' लड़की मुस्कुराई और बोली -'' आँखें नहीं ...इनमें तुम्हारे प्रति झलकता प्यार का भाव सुन्दर है !'' लड़का बोला -'' तुम्हारे होंठ गुलाब की पंखुड़ियों के समान सुन्दर हैं !'' लड़की हँसी ,उसके गालो पर लाली छा गयी और वो बोली -''मेरे होंठ सुन्दर नहीं ..ये तुम्हारे कोमल भाव हैं मेरे प्रति जिसके कारण तुम्हें ये गुलाब की पंखुड़ियां लग रहे हैं ..नहीं तो ये बहुत साधारण हैं !'' लड़के ने कहा -'' तुम्हारे गालो पर आई ये लालिमा कितनी मादक है !'' लड़की ने कहा-''ये तो तुहारे द्वारा की जा रही प्रशंसा के कारण उत्पन्न लज्जा भाव का कमाल है !'' लड़का झुंझलाकर बोला -''ओफ्फो !!! मैं तुम्हारी सुंदरता की प्रशंसा कर रहा हूँ और तुम हो कि भाव ..भाव ...भाव लिए बैठी हो !'' लड़की ठहाका लगाकर बोली -'' जो जीवित है उसमे जो भी सुंदरता है वो भावों की है ..देह की नहीं ! तुम ऐसा करना जब मैं मर जाऊं तब इस देह के प्रशंसा करना तब तुम्हें पता चलेगा कि भावों से रहित सुन्दर देह कितनी वीभत्स होती है !!''


शिखा कौशिक 'नूतन'