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गुरुवार, 13 जून 2013

हिन्दू पार्टी का मुसलमान नेता -एक लघु कथा

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हिन्दू पार्टी का मुसलमान नेता -एक लघु कथा 


टी.वी.साक्षात्कार में   जटिल   प्रश्नों  के  उत्तर देने  के  बाद  साक्षात्कारकर्ता के  इस प्रश्न पर  मिर्जा  साहब  थोडा  अटके जब  उनसे पूछा गया -'' मिर्जा  साहब  गुस्ताखी माफ़ हो ...आप एक  मुसलमान होते हुए एक हिन्दू पार्टी से पिछले बीस साल से जुड़े हुए हैं .पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहें हैं ...तब क्या महसूस किया है एक मुसलमान होकर एक हिन्दू पार्टी की विचारधारा से तालमेल बैठाने में ?''  मिर्जा साहब का चेहरा  सख्त  हो गया .वे   गंभीरता   के साथ   बोले   -'' आप बस   ये   समझ   लीजिये   जैसे   ब्याह   होते ही   लड़की   को   विदाई   के समय  बता  दिया  जाता  है कि आज  से इस घर  को  अपना  मत  समझ  लेना  और  ससुराल  में हमेशा उसको अपने चरित्र की शुद्धता का प्रमाण देना पड़ता है ...कुछ ऐसी ही स्थिति है मेरी . मुसलमान बिरादरी मुझे हिन्दू पार्टी में मेरे होने के कारण दिल से नहीं अपनाती और पार्टी के हिन्दू कार्यकर्ता मुसलमान होने के कारण मुझ पर शक करते हैं कि मैं हिन्दू पार्टी में क्यों हूँ ?'' ये कहकर वे चुप हो गए और साक्षात्कारकर्ता ''मिलते हैं ब्रेक के बाद ' कहकर खिसक लिया .

शिखा कौशिक 'नूतन'

बुधवार, 12 जून 2013

खुला -फैला आसमान -लघु कथा

खुला -फैला  आसमान -लघु कथा 


दिसंबर का माह था .सुरेश घर से बाहर निकला .गोद में दो वर्षीय उसकी पुत्री टिया थी .टिया तेज ज्वर से पीड़ित थी .गर्म कपड़ों में ढकी -छिपी बिटिया को लेकर डॉक्टर की क्लिनिक की ओर चला ही था कि पीछे से किसी कार ने  हॉर्न दिया .सुरेश ने मुड़कर देखा तो ये उसका पडोसी रमेश था .कार में उसकी पत्नी व् एक वर्षीय बेटा भी था .रमेश ने कार की खिड़की से सिर निकालकर पूछा-''क्या हुआ सुरेश ?'' सुरेश ने  टिया  को सँभालते हुए उत्तर दिया  -'बिटिया के तेज बुखार है .डॉक्टर को दिखाने ले जा रहा हूँ .'' रमेश सिर कार के भीतर ले जाते हुए बोला  -'जल्दी जाओ भाई ..आजकल बहुत फ़ैल रहा है फीवर .'' ये कहकर उसने कार आगे बढ़ा दी .सुरेश को उम्मीद थी कि शायद रमेश उसे डॉक्टर की क्लिनिक तक कार से छोड़ देगा पर .......ऐसा कुछ नहीं हुआ .इसके कुछ दिन बाद ही सुरेश टिया को गोद में लेकर घर के बाहर टहल रहा था .टिया का बुखार उतर चुका था .सुरेश ने देखा रमेश की पत्नी मीना अपने बेटे को गोद में उठाए तेजी से कहीं जा रही है .सुरेश ने पूछा -''क्या हुआ भाभी जी ?'' रमेश की पत्नी रोते हुए बोली -'' भाई साहब मेरा बेटा फीवर से तप रहा है और डॉक्टर का नंबर मिल क़र नहीं दे रहा .ये शहर से बाहर काम से गए हैं .कार भी ख़राब है ...इसीलिए बिट्टू को लेकर डॉ.गुप्ता की क्लिनिक पर जा रही हूँ .''  सुरेश बोला -' आप घबराइए मत ...मैं टिया को इसकी मम्मी को देकर आता हूँ '' सुरेश जल्दी से घर के अन्दर गया और टिया को वहां छोड़कर मीना की गोद से बिट्टू को लेते हुए बोला -''मैं जल्दी जल्दी जाता हूँ आप आराम से आ जाइये .'' ये कहकर सुरेश जल्दी जल्दी पैदल डॉ. गुप्ता की क्लिनिक की ओर चल दिया पीछे पीछे चलती मीना यही सोच रही थी कि -'' कार में उस दिन मैं भी तो बैठी थी जब सुरेश भाई साहब टिया को लेकर डॉक्टर की क्लिनिक पर जा रहे थे ...मैंने रमेश को क्यों नहीं टोका......वाकई  कार के अन्दर बैठकर दिल भी कार जितना छोटा हो जाता है .ऐसे कार वाले होने से बेहतर है सुरेश भाई साहब की तरह   बिना वाहन वाले होना .कम से कम सिर पर खुला -फैला  आसमान और पैरों के नीचे जमीन तो रहती है .''

शिखा कौशिक 'नूतन'

सोमवार, 10 जून 2013

फिर कैसा फ़तवा ?-लघु कथा

फिर कैसा फ़तवा ?-लघु  कथा


मौलाना  साहब  को  आते  देखकर  मैं  उठकर  खड़ा  हो  गया  .दुआ -सलाम  के  बाद  मैंने  उनसे  बैठने  का  आग्रह   किया  .इधर -उधर  की बातों के बाद मैंने उनसे जिज्ञासावश पूछ ही डाला -' एक बात बताइए आप लोग विभिन्न मुद्दों पर मौत का फ़तवा  जारी करते रहते हैं पर जब कोई मुसलमान एक हिन्दू पार्टी -जो मस्जिद ध्वस्त कर मंदिर निर्माण की खुले आम वकालत करती है ...ज्वाइन करता है ....पदाधिकारी बनता है.. तब आप लोग उस शख्स के खिलाफ फ़तवा जारी क्यों  नहीं करते ?'' मौलाना  साहब मुस्कुराते हुए बोले -'' पंडित जी हम ऐसे इन्सान को  ईमान बेचने वाला मानते हैं बिलकुल फिल्मों में काम करने वाली  मुस्लिम औरतों की तरह ..फिर कैसा फ़तवा ?'' मौलाना साहब ये कहते हुए उठ कर खड़े हो गए और ''ख़ुदा हाफिज '' कर चल दिए .

शिखा कौशिक 'नूतन' 

रविवार, 9 जून 2013

''आप तो मुसलमान हैं ना -लघु कथा ''

''आप तो मुसलमान हैं ना -लघु कथा ''
शबाना भड़कते हुए बोली -''...पर आप तो मुसलमान हैं ना  ..... आपने क्यों नहीं एतराज़ किया ऐसे जल्लाद को पार्टी की चुनावी  कमान सौपे  जाने पर ...अल्लाह की कसम आपकी अक्ल पर परदे पड़ गए थे क्या ?'' हिन्दू  पार्टी के मुस्लिम महासचिव  साहब  अपनी  सफ़ेद दाढ़ी को सहलाते हुए बोले --'' बेगम इतना गुस्सा सेहत के लिए ठीक नहीं है  . ...ये सियासत की बातें हैं और रही बात मुसलमान होने की तो जान लो उस जल्लाद की नाक कटवाने को ही चुनावी कमान सौप दिए जाने दी है हमने .आप क्या समझती है हमें दर्द नहीं अपने लोगों के  कत्लेआम पर !...आप से भी ज्यादा दर्द है .उस जल्लाद को देखते ही तन-बदन में आग लग जाती है ...ख़ुदा खैर करे इस बार भी पार्टी को पूर्ण  बहुमत मिलने की उम्मीद कम ही है ..अगर इस जल्लाद  की करामातों से हिन्दू वोट मिल गयी तो सत्ता में आते ही मेरा मंत्री पद पक्का है और अगर सत्ता नहीं मिली तो इस जल्लाद का ढोल पिट जायेगा ...नेता की बीवी हो दिल  से नहीं दिमाग से काम लिया करो ...वैसे भी नेता कहाँ हिन्दू-मुसलमान होता है !'' ये कहकर मुस्लिम महासचिव साहब ने जोरदार ठहाका  लगाया और अजान की आवाज पर नमाज पढने के लिए मस्जिद की और चल दिए .''

शिखा कौशिक 'नूतन '

शनिवार, 8 जून 2013

मुझे माफ़ कर दो मेरे बच्चों -लघु कथा

pistol
लघु कथा 


Cute Baby With Hat
सुबह सुबह  घर  का मुख्य  द्वार कोई जोर जोर  से पीट रहा  था .वसुधा रसोई में  नाश्ता  तैयार  कर रही थी गगन  दफ्तर जाने  के   लिए  तैयार  हो  रहा था .वसुधा काम  बीच  में  छोड़कर  झींकती  हुई  किवाड़  खोलने  को  बढ़  गयी .किवाड़  खोलते ही उसकी चीख निकल गयी -'' पिता जी आप ....ये बन्दूक ...!!!'' गगन भी वहां पहुँच चुका था .वसुधा और गगन ने दो साल पहले प्रेम विवाह किया था घर से भागकर और अपने शहर से दूर यहाँ आकर अपनी गृहस्थी  जमाई थी .वसुधा के पिता को न जाने कैसे यहाँ का पता मिल गया था . गगन की छाती पर बन्दूक सटाकर वसुधा  के पिता गुस्से में फुंकारते हुए बोले -''...हरामजादी ...पूरी बिरादरी में नाक कटा दी .आज तेरे सामने ही इस हरामजादे का काम तमाम करूंगा   !'' वसुधा दहाड़े मारकर रोने लगी तभी पायल की छन छन  की मधुर ध्वनि के साथ ''माँ ...पप्पा ...'' करती हुई एक नन्ही सी बच्ची वसुधा की ओर दौड़ती हुई आई .वसुधा के पिता का ध्यान उस पर गया तो हाथ से बन्दूक छूट   गयी और उन्होंने दौड़कर उस बच्ची को गोद में उठा लिया . ''वसु ...मेरी छोटी सी वसु ..'' ये कहते हुए उन्होंने उसका माथा चूम लिया .वसुधा रोते हुए पिता के चरणों में गिर पड़ी और फफकते हुए बोली -''पिता जी मुझे माफ़ कर दीजिये .मैंने आपका दिल दुखाया है .'' गगन भी हाथ जोड़कर उनके चरणों में झुक गया .वसुधा के पिता ने झुककर दोनों को आशीर्वाद देते  हुए कहा -'' आज अगर ये नन्ही सी वसु मेरी आँखों के सामने न आती तो न जाने दुनिया की बातों में आकर मैं क्या अनिष्ट कर डालता .मुझे माफ़ कर दो मेरे बच्चों .'' 

शिखा कौशिक 'नूतन' 

बुधवार, 5 जून 2013

माँ और सासू माँ में अंतर -एक लघु कथा

Talking on mobile phone Stock ImagesIndian woman talking on phone Stock Photo   

माँ और सासू माँ में अंतर -एक लघु कथा 

साल भर के लम्बे अन्तराल के बाद स्नेहा की सहेली कनक का फोन आया तो स्नेहा ने उलाहना देते हुए कहा -'' आ गई सहेली की याद ?'' कनक माफ़ी मांगते हुए बोली -''...अरे ऐसा क्यों कह  रही हो ! ....तुम भी तो कर सकती थी फोन ....चल छोड़ ...बता कैसा चल रहा है तेरा घर-संसार ?'' स्नेहा उदास स्वर में बोली -'' क्या बताऊँ ,,छह महीने पहले माँ चल बसी और तीन महीने पहले सासू माँ .'' कनक लम्बी आह भरते हुए बोली -.ओह ..सो सेड ...आंटी एक्पायर  हो गयी .....उनकी कमी तो तेरे जीवन में कोई भी पूरी नहीं कर सकता ...माँ तो माँ ही होती है.... .तेरी सासू माँ को क्या हो गया था ?'' स्नेहा ने खुद को सँभालते हुए बताया -'' वे बीमार थी .'' कनक सांत्वना देते हुए बोली ''...चल अब तो रानी बनकर राज कर ससुराल में ..अकेली बहू है वहाँ तू .''  स्नेहा कनक को डांटते  हुए बोली -''कैसी बाते कर रही है तू ...मेरे लिए माँ और सासू माँ में कोई अंतर नहीं था और फिर यदि मेरी भाभी भी मेरी माँ की मृत्यु पर राहत  की साँस ले तो मुझे कैसा लगेगा ? ये कहकर स्नेहा ने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया .

शिखा कौशिक 'नूतन'

रविवार, 2 जून 2013

पुलिस की छवि -एक लघु कथा

Little_boys : illustration of a boy cheering on a white backgroundLittle_boys : illustration of a naughty boy  on white background  
जून के माह में शाम को  बगीचे में आराम कुर्सी पर बैठकर हुक्का गुडगुडा रहा था .दोनों पोते वहीँ उधम मचा रहे थे .हनी व् सनी के खेल में मुझे भी मज़ा आने लगा था .सात वर्षीय हनी अकड़ते हुए बोला  -'' सनी तू मेरे से एक साल छोटा  है ...तू चोर बनेगा और मैं इंस्पेक्टर .चल भाग ....मैं पकड़ता हूँ तुझे .''इसके बाद दोनों मेरी आराम कुर्सी के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने लगे .सनी बगीचे से निकलकर अन्दर घर की ओर भाग लिया .हनी उसके पीछे पीछे भाग लिया .सनी उसे चकमा देकर फिर से बगीचे में मेरे पास आ गया .मैंने उसे एक ओर इशारा करते हुए कहा- ''वहां छिप जा ....मैं नहीं बताऊंगा .'' सनी हाँफते हुए बोला   -''  अरे  नहीं दददू ....छिपने की जरूरत नहीं ...आप मुझे दस का नोट दे दीजिये ..मैं अभी हनी को रिश्वत देकर छूट जाता हूँ .'' सनी की  बात सुनकर मैं स्तब्ध रह गया कि पुलिस की छवि   बच्चे -  बच्चे   के दिमाग में क्या बन चुकी है ! मैंने हल्की सी चपत सनी के गाल पर लगाई तभी पीछे से हनी ने सनी को आकर पकड़ लिया .

शिखा कौशिक 'नूतन'