समर्थक

शनिवार, 7 दिसंबर 2013

आकर्षक कवयित्री -लघु कथा

''अरे वाह ! माँ कितनी सुन्दर लग रही हो ......पर लिपिस्टिक थोडा डार्क लग रही है ....और बालों का आपका ये स्टाइल तो बिजली ही गिरा रहा है ...पर ये बैंगिल तो मेरी है ...आपने क्यूँ ली माँ ! आप किसी पेज थ्री पार्टी में जाने के लिए तैयार हो रही हैं क्या ?'' किशोरी रिया की बात पर ड्रेसिंग टेबिल के आईने में अपने को ऊपर से नीचे तक निहारते हुए उसकी माँ चहकते हुए बोली - '' अरे नहीं ...पार्टी में नहीं आज मुझे कवि-सम्मलेन में कविता-पाठ करने जाना है .लोग कविता थोड़े ही सुनने आते हैं ???वरना निर्मला जी की तुलना में मेरी कविताओं की ज्यादा वाह-वाहवाही कोई करता क्या ? निर्मला जी ठहरी गाँधीवादी महिला .साधारण रहन-सहन !अब कौन समझाए उन्हें कवयित्री का आकर्षक दिखना भी कितना जरूरी होता है ! '' ये कहकर रिया की माँ ने अपने पर परफ्यूम का स्प्रे किया और अपने को महकाने के साथ साथ सारे वातावरण को बहका दिया .
शिखा कौशिक 'नूतन'

कोई टिप्पणी नहीं: